hostel horror story

दहशत की रात- हॉस्टल की एक डरावनी रात- Horror Story Hindi

दहशत की रात- हॉस्टल की एक डरावनी रात- Horror Story Hindi
 
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दहशत की रात


यह बात तब कि हैं जब मे एक कंपनी मे काम करता था। मे जिस कंपनी मे काम करता था वो मेरे गाव से बाहर थी मुझे घर से कंपनी तक जाने मे लगभग आधे घंटे का समय लगता था, मेरे पास एक मोटरसाइकिल थी जिससे मे आया जाया करता था।मेरा काम शाम 6 बजे तक खत्म हो जाता था। हमारे यहाँ सड़क का काम चल रहा था। एक दिन की बात है जब मेरे मैनेजर ने कहा कि आज कुछ वर्कर्स कम पड़ जाने के कारण तुम्हें ओवरटाइम करना पड़ेगा, उसने कहा कि तुम्हें इससे कोई समस्या तो नहीं है, में तुम्हें ओवरटाइम के  एक्स्ट्रा पैसे भी दूँगा, मुझे इससे कोई समस्या नहीं थी।


 उस दिन पूर्णिया की रात थी ओर कहा जाता है कि ऐसे टाईम पर ऊपरी शक्तियां अधिक ताकतवर हो जाती है। मेरा काम रात दस बजे खत्म हुआ। मेने अपनी मोटरसाइकिल स्टार्ट की ओर मे अपने घर की तरफ निकल पड़ा, मेरी बाइक की स्पीड कम थी क्यूंकि सड़क का काम चलने के कारण मेने अपनी सुरक्षा के लिए ऐसा किया था। चलते हुए मुझे रास्ते मे एक आदमी खड़ा हुआ दिखाई दिया वो सड़क के किनारे एक पेड़ के पास खड़ा था मेने सोचा लगता है गाव वाला है जो गाव जा रहा होगा ओर शायद थक गया होगा इसलिए वहां आराम कर रहा है। चलो इसको लिफ्ट दि जाये। मेने मेरी मोटरसाइकिल उससे थोड़ी दूर रोक कर उससे कहा भाई कहा जाना, अगर ऐतराज न हो तो मे तुम्हें कही छोड़ दू, उधर से कोई जवाब नहीं आया। मेने एक बार फिर कहा कि मे गाव ही जा रहा हूँ तुम कहो तो छोड़ दु। 


अब भी कोई जवाब नहीं मुझे गुस्सा आया ओर मेने अपनी बाइक स्टार्ट की घर जाने के लिए वो आदमी मेरी तरफ आने लगा, मेने सोचा कि अब इसकी अक्ल ठिकाने आई है, अब वह काफी पास आ गया था मेने उसकी तरफ देखा चाँद की रोशनी मे मेने देखा की उसके पैर इंसानो की तरह नहीं बल्कि किसी जानवर की तरह थे ओर वो धीरे धीरे अब पूरा जानवर मे बदल रहा था यह सब देखकर मेने बाइक फुल रफ़्तार मे भगायी, मुझे कुछ समझ मे नही आया कि वो सब क्या है? मेने उसे देखा तो नहीं पर मे महसूस कर पा रहा था कि वो मेरा  पीछा कर रहा है।


सड़क खराब थी मेरी बाइक का संतुलन बिगाड़ा ओर मे नीचे गिर गया, पर मे तेजी से उठा ओर भागने लगा। में ज़ोर ज़ोर से हनुमानजी का नाम लेने लगा, मे जितना तेजी से हो सके उतना तेजी से भागा। मेने पीछे पलट कर भी नहीं देखा थोड़ी देर बाद मे अपने घर पहुच गया, मेने दरवाजे को जोर जोर  से पीटा मेरे भाई ने दरवाजा खोला मेने तुरंत दरवाजा बंद किया ओर जाके कुर्सी पर बैठ गया मेरी यह हालत देख सब पूछने लगे क्या हुआ, मेने पूरी बात बता दी कि मेरे साथ क्या घटा, सबको मेरी बात पर विश्वास था, क्योंकि जैसी मेरी उस समय हालत थी सबको विश्वास करना पड़ा। में मारे डर के रात भर ना सो सका अगली सुबह मे काम पर भी नहीं गया, मेरी तबीयत भी खराब थी, एक हफ्ते तक , मैं पलंग पर ही पड़ा रहा था। 


मेरे पापा इन सब चीजों मे जानकारी रखने वाले एक आदमी को घर लाये, उसने कहा कि जिसे तुम मिले थे वो एक प्रेत था जो एक जानवर के रूप में था, तेरी किस्मत सही थी या यू कहे कि किसी शक्ति ने तुझे बचाया क्यूंकि वो तुझे जिंदा नहीं छोड़ता, फिर उन्होने मुझे एक चांदी की माला दि ओर कहा इसे अपने गले मे बांधे रखना। 


कुछ समय बाद मे ठीक हो गया, मेने उस प्रेत को फिर कभी नहीं देखा।

मेने वो नौकरी भी छोड़ दी।

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