एक खूनी हत्यारा Ek Khooni Hatyara | Horror Story In Hindi

एक खूनी हत्यारा Ek Khooni Hatyara

Ek Khooni Hatyara, यह कहानी एक हॉरर कॉमिक (सोर्स अज्ञात) पर आधारित है, जिसे एक सबसे डरावनी कॉमिक माना जाता है। इसमें एक छोटा लड़का होता है, जिसे शक होता है कि उसका पिता शायद एक हत्यारा है।

मुझे याद है वह क्रिसमस जब मैं 8 साल का था। यह मानो ऐसा लगता है जैसे यह कल की ही बात हो। मुझे याद है कि किस तरह से मैं अपनी मां के द्वारा बनाई गई पुरानी रजाई के अंदर बड़ी शांति से लेटा हुआ था। मैं पूरी तरह से जगह हुआ था और आती हुई आवाजों को सुन रहा था ,जिन्हें मैं अच्छी तरह से पहचानता था।


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दरवाजे के बंद होने की आवाज…. (धड़ाम )

मेरे पिता के जूतों की सीढ़ियों पर चलने की आवाज…. (टक..टक..टक)

और उस दिन कि वह आवाजें अभी भी मेरे अंदर डर भर देती हैं।

उसके बाद, मेरे पिता मेरे दरवाजे से गुजरे और हॉलवे की लाइट से उनकी परछाई मेरे कमरे की दीवार पर पड़ी और साथ में उनकी कुल्हाड़ी की परछाई जो उनके हाथ में थी। मैं यह बात तो नहीं जानता कि वो उन कुल्हाड़ी का क्या करते हैं? पर वह कुल्हाड़ी हमेशा ही उनके हाथों में होती है।

अगली सुबह, मैं हमारे किचन में बैठकर खाना खा रहा था।  तब मैंने अपनी मां से धीमी आवाज में पूछा कि मां पिछली रात पिताजी कहां थे?

 उन्होंने बस अपनी उदास आंखों से मेरी तरफ देखा। मैं उनकी आंखों में जो दर्द था उसे कभी नहीं भुला पाऊंगा। पर उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा।

ब्रेकफास्ट के बाद में अपने फार्म के कामकाज में लग गया। मेरे पिता ने फार्म में कभी भी ज्यादा काम नहीं किया। वह हमेशा ही दूसरे कामों में व्यस्त रहते थे।

यह बात उन ठंडी और हवादार सुबहों की है, जब बर्फ पड़ना शुरू ही हुई थी। उस समय मेरे पास सोचने के लिए बहुत ही ज्यादा समय था।

स्कूल में, मैं अपनी पढ़ाई पर भी ज्यादा फोकस नहीं कर पाता था ,क्योंकि मैं हमेशा ही अपनी समस्याओं और अपने विचारों में खोया रहता था। जब शाम को मैं अपने घर आता था ,तब मैं समय पर अपने घर पहुंच जाता था, ताकि मैं अपने पिता को जाते हुए देख सकूं। उनके हाथ में हमेशा ही उनकी कुल्हाड़ी होती थी।  मैंने मुश्किल से ही अपने पिता को दिन की रोशनी में देखा होगा।  और जब रात होती थी तो जो भी मैं देखता था वह केवल उनकी धुंधली परछाई ही होती थी। 

मुझे वह भयानक रात अभी भी अच्छे से याद है। जब मेरी नींद मेरी खिड़की की खटखट की आवाज से खुली थी। यह समय दिसंबर का था। दिसंबर में चलने वाली ठंडी हवाओं के कारण खिड़की खटखटा रही थी। जब मैं खिड़की बंद करने जा रहा था, तब मेरी नजर मेरे फार्म पर पड़ी और मैंने अंधेरे में एक परछाई को नोटिस किया। यह मेरे पिताजी की परछाई थी जो किसी चीज को जानवरों के फीडबॉक्स (जानवरों को चारा डालने वाले बॉक्स )में डाल रहे थे।

मैं वापिस से अपने बिस्तर पर आया और उस पर लेट गया।  जो मैंने देखा था ,उससे मैं हैरान था।  आखिरकार मुझे नींद आ गई, पर यह ठीक तरह की नींद नहीं थी।  मेरे कहने का मतलब मैं सही से सो नहीं पाया था।

अगले दिन मेरी उत्सुकता के कारण मैंने किचन में लटकी हुई चाबी को उठाया और उस फिडबॉक्स को ओपन किया।  तब मैंने वहां जो देखा उसे देखकर तो मेरे पूरे शरीर में डर की एक लहर दौड़ गई। उस फीडबॉक्स के अंदर एक गंदी बदबू थी और उसके अंदर केवल खून ही खून था।  पर मेरे पिता ऐसा क्यों करेंगे? वह क्यों जानवरों के टुकड़ों को इस फीडबॉक्स के अंदर रखेंगे। थोड़े समय बाद ,मैंने किसी चीज को नोटिस किया ,जिसने मेरे शरीर में डर की एक लहर भर दी थी।

उस फीडबॉक्स के पेंदे में, कई सारे लोगों के कटे हुए हाथ पड़े थे। उस क्षण, मैं खौफ से भर गया। अब मेरा अपने माता-पिता से भरोसा उठ गया था । अब मैं उन्हें केवल शक की नजर से देखने लगा था। 

तब मुझे कुछ चीजें याद आने लगी ,जिन पर पहले मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। न्यूज़पेपर की हैडलाइनस जिन पर बताया गया था…… ब्रूटल मडर और डिस्कवर्ड बॉडीज …  के बारे में और उन लोगों को एक सनकी खूनी हत्यारे के बारे में बात करते हुए। 

अंत में ,एक स्कूल के लड़के के दो शब्द जो मेरे दिमाग में बार-बार रिपीट होते हैं एक्स मर्डरर (कुल्हाड़ी से हत्या करने वाला). Ek Khooni Hatyara.

उस रात मेरी नींद डर के कारण गायब थी। मुझे अपने डरावने सपनों में केवल दो ही चीजें दिखाई दे रही थी, एक तो मेरे पिता और दूसरा उनकी वह कुल्हाड़ी। (जिससे खून टपक रहा था) 

मैं सो नहीं सकता था। मैं अपने बिस्तर से उठा और सीढ़ियों तक गया। मैंने अपने पिता की कुल्हाड़ी को उठाया जो कि बेसमेंट में रखी हुई थी और मैं सीढ़ियों के एक तरफ अंधेरे जगह पर जाकर छिप गया।

मैंने दरवाजे को खोलते हुए और बंद होते हुए सुना। मुझे उन्हीं कदमों की आवाज सुनाई दी , जिन्हें मैं अच्छी तरह से जानता था। यह कदमों की आवाज मेरे पिता की थी।

मेरे पिता धीरे-धीरे सीढ़ियों से ऊपर आने लगे और जैसे ही वो ऊपर आये , मैंने तभी अंधेरे से बाहर निकलकर उस कुल्हाड़ी से एक जोर का हमला किया। कुल्हाड़ी के एक ही हमले से मेरे पिता का सिर कटकर उनके शरीर से अलग हो गया। उनका शरीर सीढ़ियों से फिसलता हुआ  नीचे वाले फर्श पर जा पड़ा।  उसके बाद बस फिर सब कुछ शांत हो गया।

उस समय मैंने ध्यान से सुनने का प्रयास किया कि कहीं मेरी मां के कमरे से कोई आवाज तो नहीं आ रही है।  मैं आशा करता हूं कि मेरी मां ने कुछ ना सुना हो।  जो भी कुछ उस समय ,मैं  सुन पा रहा था, वह केवल मेरे दिल की आवाज थी। मैंने अपने हाथों की तरफ देखा। मेरे हाथ कांप रहे थे और इन सब के अलावा वहां कुछ भी नहीं था  मैंने एक आखरी बार अपने मरे हुए पिता की तरफ देखा। उसके बाद मैं अपने कमरे में चला गया।

अगली सुबह मुझे कई सारे लोगों की आवाज सुनाई दे रही थी, जो कि मेरे हॉलवे में से आ रही थी। मैंने धीरे धीरे सीढ़ियों से नीचे की ओर देखा। कुछ पुलिस वाले मेरे मरे हुए पिता के शरीर के आसपास जमा थे।  मेरी मां उनके एक ओर खड़ी थी, चुपचाप , वह सब कुछ देख रही थी। किसी ने भी मुझ पर ध्यान नहीं दिया ,पर जब मेरी मां ने मेरी और देखा तो उन्होंने मुझे नोटिस किया। वह जब मेरी तरफ देख रही थी।  तब उन्होंने बहुत ही खामोश तरीके से मेरी तरफ अपनी पलक झपकाईं।

तो दोस्तों यह थी एक  ऐसे लड़के की कहानी , जिसका पिता एक खूनी हत्यारा होता है और जब उस लड़के को इसके बारे में पता चलता है वह इस गिल्ट के साथ में अपने पिता को जान से मार डालता है। दोस्तों यह कहानी एक काल्पनिक कहानी है और यह कहानी एक हॉरर कॉमिक्स से ली गई है जिसे एक समय में सबसे हॉरर कॉमिक माना जाता था।

पढ़ने के लिए धन्यवाद।

दोस्तों, मैं आशा करता हूँ कि आपको Ek Khooni Hatyara (एक खूनी हत्यारा) शीर्षक वाली यह Real Horror Story पसंद आई होगी। ऐसी और भी Real Ghost Stories In Hindi में सुनने के लिये, हमारे ब्लॉग Horrorstoryhindi.com पर बने रहे। यदि आप YouTube पर Ghost Stories सुनना पसंद करते है तो मेरे YouTube ChannelCreepy Content” को सब्सक्राइब कर ले।

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