उसकी मृत पत्नी की तस्वीर (Wife Photograph) Horror Story: जब एक फोटो ली जाती है तो उसमे एक महिला भी दिखाई देती है जो कि मर चुकी होती है।
यह कहानी जब पहली बार सुनाई गई थी तो इसने चारों ओर हलचल मचा दी थी। यह अख़बारों में भी छपी और कई बड़े वैज्ञानिकों और प्राकृतिक दार्शनिकों (प्रकृति और विज्ञान को समझने वाले विद्वान) ने, कम से कम उन्हें ऐसा लगा, कि वे इस अजीब घटना को समझा सकते हैं। मतलब कि बड़े-बड़े विद्वान भी इसे सुलझाने में असफल रहे। मैं अब आपको यह घटना सुनाऊँगा और यह भी बताऊँगा कि लोगों ने इसका क्या स्पष्टीकरण दिया था। उसके बाद आप खुद अपना निष्कर्ष निकाल सकते हैं।
घटना इस प्रकार है कि…
मेरे एक दोस्त थे, जो मेरे ही दफ्तर में क्लर्क थे। वे शौकिया फोटोग्राफर (पेशेवर नहीं, शौक के लिए फोटो खींचने वाले) थे। मान लीजिए उनका नाम जोन्स था।
जोन्स के पास हाफ प्लेट सैंडरसन कैमरा (एक पुराना कैमरा) था, जिसमें रॉस लेंस और थॉर्नटन पिकार्ड शटर (कैमरे में फोटो खींचते समय खुलने-बंद होने वाला हिस्सा) लगा था। इसमें न्यूमैटिक रिलीज़ (हवा के दबाव से चलने वाला बटन) की सुविधा थी। जिस प्लेट पर फोटो ली गई थी, वह रैटन की ऑर्डिनरी प्लेट (पुरानी कैमरा कंपनी से सम्बंधित) थी, जिसे इलफोर्ड पायरो सोडा (एक प्रकर का रसायनिक घोल) डेवलपर से विकसित किया गया था। यह डेवलपर घर पर ही तैयार किया गया था। ये सारी तकनीकी जानकारी उन पाठकों के लिए दी गई है जो फोटोग्राफी के बारे में जानकारी रखते हैं।
मिस्टर स्मिथ, जो हमारे दफ्तर में एक और क्लर्क थे, उन्होंने मिस्टर जोन्स को अपनी पत्नी और अपनी साली की तस्वीर खींचने के लिए बुलाया। यह साली दरअसल स्मिथ के बड़े भाई की पत्नी थी। उनका बड़ा भाई भी सरकारी नौकरी में था और उस समय छुट्टी पर था। असल में फोटो खिंचवाने का विचार उसी साली का था।
जोन्स खुद बहुत उत्साही फोटोग्राफर थे। उन्होंने दफ्तर में सभी लोगों की तस्वीरें खींची थीं, यहाँ तक कि चपरासी और सफाईकर्मियों की भी और उन्होंने हर व्यक्ति को, जिसकी वे फोटो खिंचते थे, उनकी तस्वीरों की एक प्रति भी देते थे। इसलिए उन्होंने बहुत खुशी से यह निमंत्रण स्वीकार किया और उत्सुकता से रविवार का इंतज़ार करने लगे, जिस दिन फोटो खींची जानी थी।
रविवार की सुबह-सुबह जोन्स, स्मिथ के घर पहुँचे। बरामदे में रोशनी की व्यवस्था ऐसी थी कि फोटो दोपहर के बाद ही ली जा सकती थी। इसलिए वे वहीं नाश्ता करने रुक गए।
दोपहर करीब एक बजे सारी तैयारियाँ पूरी हो गईं। दोनों महिलाएँ, श्रीमती स्मिथ और उनकी बहन, दो बेंत की बनी कुर्सियों पर बैठ गईं। जोन्स ने लगभग एक घंटे तक ध्यान से कैमरे को इधर-उधर किया और फोकस ठीक किया। आखिरकार जब वह पूरी तरह संतुष्ट हुआ, तो तस्वीर खींची गई।
जोन्स को पूरा विश्वास था कि प्लेट (फोटो की शीट/पुरानी कैमरा तकनीक) बिल्कुल सही है। इसलिए उसने दूसरी प्लेट पर फोटो नहीं ली, जबकि सामान्य तौर पर बैकअप के लिए ऐसा किया जाता है। उसने अपना सामान समेटा और घर चला गया, यह वादा करते हुए कि वह उसी रात प्लेट डेवलप (फोटो तैयार करना) करेगा और अगले दिन ऑफिस में फोटो की कॉपी लेकर आएगा।

अगले दिन, सोमवार को, जोन्स बहुत सुबह ही ऑफिस पहुँच गया। सबसे पहले मेरी उससे मुलाकात हुई।
मैंने पूछा, “तो मिस्टर फोटोग्राफर, कैसा रहा काम?”
जोन्स ने बिना माउंट की हुई (बिना फ्रेम की) तस्वीर निकालते हुए कहा, “फोटो तो मिल गई… लेकिन ज़रा देखो, कितनी अजीब है, है ना?”
मैंने कहा, “मुझे तो बिल्कुल ठीक लग रही है… कम से कम तुमसे इससे बेहतर की उम्मीद नहीं थी।”
जोन्स बोला, “नहीं, अजीब बात यह है कि वहाँ सिर्फ दो औरतें बैठी थीं…फोटो लेते समय।”
मैंने कहा, “हाँ, तीसरी तो बीच में खड़ी है।”
जोन्स बोला, “वहाँ कोई तीसरी औरत थी ही नहीं…”
मैंने कहा, “तो तुमने समझा होगा कि वो थी, और अब देखो — वो तस्वीर में भी है…”
जोन्स ज़ोर देकर बोला, “मैं कह रहा हूँ, जब मैंने फोटो खींची थी तब वहाँ सिर्फ दो ही औरतें थीं।” वह बहुत चिंतित दिख रहा था।
मैंने कहा, “तुम चाहते हो मैं यकीन करूँ कि जब प्लेट पर फोटो खींची गई तब दो लोग थे, और जब उसे डेवलप किया गया तो तीन हो गए?”
जोन्स ने जवाब दिया, “हाँ, बिल्कुल यही हुआ है।”
मैंने कहा, “तो फिर तो तुम्हारा डेवलपर (फोटो तैयार करने का घोल) वाकई कमाल का है… या फिर तुमने गलती से उसी प्लेट पर दो बार एक्सपोज़र (फोटो खींचना) कर दिया?”
जोन्स ने कहा, “डेवलपर (फोटो तैयार करने का घोल) वही है जो मैं पिछले तीन साल से इस्तेमाल कर रहा हूँ। और प्लेट वही थी जिसे मैंने शनिवार की रात एक नए डिब्बे में से निकाला था। वह डिब्बा मैंने शनिवार की दोपहर ही खरीदा था।”
इस बीच दफ्तर के कई और क्लर्क (दफ्तर में काम करने वाले कर्मचारी) वहाँ आ गए थे। वे सब उस तस्वीर और जोन्स के बयान में बहुत रुचि ले रहे थे।
पाठकों की सुविधा के लिए अब उस तस्वीर का वर्णन देना ज़रूरी है। काश, मैं वह असली तस्वीर भी दिखा पाता, लेकिन कुछ कारणों से यह संभव नहीं है।
जब प्लेट पर फोटो खींची गई थी, तब वहाँ केवल दो महिलाएँ थीं, और दोनों बेंत की कुर्सियों पर बैठी थीं। लेकिन जब प्लेट डेवलप की गई, तो तस्वीर में बीच में एक तीसरी महिला का चित्र दिखाई दिया, जो वहाँ खड़ी थी। उसने चौड़े किनारे वाली धोती पहन रखी थी (ध्यान रहे — कहानी के सभी पात्र भारतीय हैं। एडिटर: मुझे नहीं पता की उस समय महिलायें धोती पहनती थी क्या? मैंने ओरिजिनल कहानी में इसी का जिक्र पाया तो लिख दिया।)। तस्वीर में उसके शरीर का केवल ऊपरी हिस्सा ही साफ़ दिखाई दे रहा था, क्योंकि निचला हिस्सा कुर्सियों की नीची पीठ (पीछे का हिस्सा) से ढक गया था। वह स्पष्ट रूप से कुर्सियों के पीछे खड़ी थी, इसलिए उसकी छवि थोड़ी धुंधली थी। फिर भी तस्वीर में हर चीज़ बिल्कुल साफ़ दिखाई दे रही थी। यहाँ तक कि उसके दाएँ कंधे के पास धोती के छोटे से खुले हिस्से में उसकी लंबी माला भी साफ दिख रही थी। उसने अपने हाथ कुर्सियों की पीठ पर टिकाए थे। उसकी उँगलियाँ लगभग पूरी तरह धुंधली थीं, लेकिन उसकी दाहिनी हाथ की अनामिका (चौथी उंगली) में पहनी हुई अंगूठी साफ़ दिखाई दे रही थी। वह लगभग बाईस साल की एक खूबसूरत, छोटी कद की और पतली महिला लग रही थी। उसके कान की एक बाली भी स्पष्ट दिखाई दे रही थी, हालाँकि उसका चेहरा थोड़ा धुंधला था। एक और बात, जो उस समय तो हमारी नज़र में नहीं आई, लेकिन बाद में ध्यान गई, तीनों महिलाओं के पीछे एक सलाखों वाली खिड़की थी। दोनों ओर बैठी हुई महिलाओं के शरीर ने नीचे की तरफ कुछ हिस्से में उन सलाखों को ढक दिया था। लेकिन बीच में खड़ी महिला आधी पारदर्शी थी, क्योंकि उसके पीछे की खिड़की की सलाखें हल्के रूप में उसकी फोटो के आर-पार दिख रही थीं। हालाँकि उस समय हमने इस बात पर ध्यान नहीं दिया। हम तो बस जोन्स पर हँस रहे थे और उसे समझा रहे थे कि शायद वह नशे में था या सो रहा था। उसी समय हमारे दफ्तर में काम करने वाले श्रीमान स्मिथ अंदर आए, अपनी पैंट की क्लिप (साइकिल चलाते समय पैंट में लगाई जाने वाली क्लिप) उतारते हुए।
स्मिथ ने बिना फ्रेम की हुई तस्वीर हाथ में ली, उसे एक मिनट तक देखा, और उनका चेहरा लाल, नीला, हरा होकर अंत में बहुत पीला पड़ गया। हमने स्वाभाविक रूप से उनसे पूछा कि क्या हुआ।
तब उन्होंने कहा, “बीच में जो तीसरी औरत खड़ी है, वह मेरी पहली पत्नी है, जिसकी मृत्यु को अब आठ साल हो चुके हैं। उसकी मृत्यु से पहले उसने मुझसे कई बार कहा था कि उसकी एक तस्वीर खिंचवा ली जाए। वह अक्सर कहती थी कि उसे पहले से अहसास (पूर्वाभास) है कि वह जल्दी मर जाएगी। मैं उसके इस पूर्वाभास पर विश्वास तो नहीं करता था, लेकिन मैंने उसकी बात का विरोध भी नहीं किया। एक दिन मैंने गाड़ी (उस समय की सवारी गाड़ी) मंगवाई और उसे तैयार होने के लिए कहा। हम किसी अच्छे फोटोग्राफर के पास जाकर उसकी तस्वीर खिंचवाने वाले थे। वह तैयार हो गई और गाड़ी भी आ गई, लेकिन जैसे ही हम निकलने ही वाले थे, खबर आई कि उसकी माँ की तबीयत बहुत गंभीर है। इसलिए हम तस्वीर खिंचवाने की बजाय उसकी माँ से मिलने चले गए। उसकी माँ बहुत बीमार थी, इसलिए मैंने उसे वहाँ छोड़ दिया। इसके तुरंत बाद ही मुझे ड्यूटी पर दूसरे स्टेशन भेज दिया गया और मैं उसे वापस नहीं ला सका। मैं साढ़े तीन महीने बाद लौटा। तब उसकी माँ तो ठीक थी, लेकिन मेरी पत्नी नहीं। मेरे लौटने के पंद्रह दिन के अंदर ही उसकी प्रसव ज्वर (प्रसव के बाद होने वाला संक्रमण/तेज़ बुखार) से मृत्यु हो गई। उसके साथ बच्चे की भी मृत्यु हो गई। उसकी कोई तस्वीर कभी खिंची ही नहीं गई। जिस दिन वह मेरे घर से आखिरी बार निकली थी, उसने यही हार और झुमके पहने थे, जो आप तस्वीर में उसे पहने देख रहे हैं। ये गहने अब मेरी वर्तमान पत्नी के पास हैं, लेकिन वह इन्हें आम तौर पर नहीं पहनती।”
यह बात मेरे लिए मानना बहुत कठिन था। इसलिए मैंने तुरंत ऑफिस से बिना बताए छुट्टी ली (फ्रेंच लीव: बिना अनुमति लिए ऑफिस छोड़ना), तस्वीर उठाई और साइकिल पर सवार होकर तेज़ी से श्रीमान स्मिथ के घर पहुँच गया। वहाँ मैंने श्रीमती स्मिथ से मुलाकात की। तस्वीर में तीसरी औरत को देखकर वह बहुत हैरान हुईं, लेकिन वह पहचान नहीं सकीं कि वह कौन है। यह तो मुझे पहले से ही उम्मीद थी, क्योंकि अगर स्मिथ की कहानी सच थी तो उनकी वर्तमान पत्नी ने अपनी पति की पहली पत्नी को कभी देखा ही नहीं था। लेकिन स्मिथ के बड़े भाई की पत्नी ने तस्वीर को देखते ही उस औरत को पहचान लिया। उन्होंने उसी कहानी को दोहराया जो स्मिथ ने पहले ही उसी दिन मुझे बताई थी। उन्होंने हार और झुमके भी निकालकर मुझे दिखाए ताकि मुझे यकीन हो जाए। वे वही गहने थे जो तस्वीर में दिखाई दे रहे थे।
उस समय के सभी बड़े अखबारों को यह खबर लग गई। एक हफ्ते के भीतर ही उस “भूतिया तस्वीर” की कई प्रतियों के लिए आवेदन आने लगे। लेकिन श्रीमान जोन्स ने किसी को भी उसकी कॉपी देने से इनकार कर दिया। इसका मुख्य कारण था कि स्मिथ ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। हालाँकि, मेरे पास उसकी एक कॉपी है, लेकिन स्पष्ट कारणों से मैं उसे किसी को दिखा नहीं सकता। उस तस्वीर की एक कॉपी अमेरिका और एक इंग्लैंड भेजी गई थी, लेकिन अब मुझे ठीक-ठीक याद नहीं कि किसे भेजी गई थी।
मैंने अपनी कॉपी एक पादरी (ईसाई धर्मगुरु) को दिखाई, जिनके नाम के साथ M.A., D.Sc., B.D. आदि उपाधियाँ थीं। मैंने उनसे अनुरोध किया कि वे इस अजीब घटना का कोई वैज्ञानिक कारण बताएं। उन्होंने इस तरह समझाया (उनके शब्द मैं ठीक-ठीक नहीं दोहरा सकता, लेकिन उनका मतलब यही था):
“यह लड़की लगभग दस साल पहले किसी मौके पर ठीक इसी तरह तैयार हुई थी। उसकी छवि अंतरिक्ष में पड़ी और एक प्रकाशमान ग्रह (जो प्रकाश देता है, जैसे ग्रह या तारा) से दूसरे पर परावर्तित होती रही। यह छवि अंतरिक्ष में लाखों-करोड़ों मील का चक्कर लगाकर वापस पृथ्वी पर ठीक उसी समय लौटी, जब हमारे मित्र श्रीमान जोन्स तस्वीर लेने वाले थे।”
“उदाहरण के लिए मान लीजिए एक आदमी मृगतृष्णा (गर्मी में दूर से पानी या दृश्य जैसा भ्रम दिखना) की फोटो खींच रहा है। वह स्थान Y से स्थान X की फोटो ले रहा है, जबकि X और Y के बीच लगभग 200 मील की दूरी है। हो सकता है उसका कैमरा पूरब की ओर हो, लेकिन स्थान X वास्तव में Y के पश्चिम में हो।”
स्कूल में मैंने थोड़ी बहुत विज्ञान और रसायन शास्त्र पढ़ी थी, और नमक का सूखा विश्लेषण (रासायनिक जांच) करना जानता था, लेकिन यह बात मेरी समझ से परे थी।
फिर भी, सच्चाई यही है और मैं इस पर विश्वास करता हूँ कि स्मिथ की पहली पत्नी अपनी मृत्यु के आठ साल बाद फिर से इस धरती पर आई, ताकि वह अपनी तस्वीर खिंचवा सके। वह ऐसे रूप में आई जो हमारी आँख की रेटिना (आँख के अंदर की वह परत जिस पर तस्वीर बनती है) पर तो दिखाई नहीं दी, लेकिन कैमरे की संवेदनशील प्लेट (फोटो रिकॉर्ड करने वाली विशेष प्लेट) पर उसकी छवि अंकित हो गई।
मैं दोबारा कहता हूँ, वह आँखों को नहीं दिखी, क्योंकि तस्वीर खींचते समय जोन्स कैमरे के सामने बैठी महिलाओं को ही देख रहा था, जब उसने न्यूमैटिक रिलीज़ (कैमरे में फोटो खींचने का बटन) दबाया था।
यह कहानी बहुत अद्भुत है, लेकिन यही वास्तव में हुआ था। स्मिथ का कहना है कि यह पहली बार था जब उसने अपनी मृत पत्नी को देखा या उससे किसी प्रकार का संकेत पाया। भारत में आम धारणा है कि अगर किसी मृत पत्नी की आत्मा धरती पर वापस आती है, तो वह पति को बहुत परेशान करती है। लेकिन, शुक्र है, स्मिथ के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ।
अब इस घटना को घटे सात साल से भी अधिक का समय बीत चुका है, और वह महिला फिर कभी दिखाई नहीं दी। मैंने कई बार सोचा कि उन दोनों महिलाओं की दोबारा एक तस्वीर खिंचवाई जाए, लेकिन कभी स्मिथ से यह प्रस्ताव रखने की हिम्मत नहीं जुटा सका। दरअसल, इसी उद्देश्य से मैंने खुद फोटोग्राफी सीखी थी, ताकि मैं यह तस्वीर खींच सकूँ, लेकिन जैसा मैंने कहा, मैं कभी स्मिथ से अपनी इस इच्छा के बारे में बात नहीं कर पाया, और शायद कभी कर भी न पाऊँ। मैंने इस काम के लिए अपने सीमित साधनों में से £10 खर्च करके एक सस्ता फोटोग्राफिक सेट (कैमरा और फोटो खींचने का पूरा सामान) खरीदा। यह पैसा शायद व्यर्थ चला गया हो, लेकिन मैंने एक ऐसी कला सीख ली जो महंगी होने के बावजूद सीखने योग्य है।
So I hope Guys आपको यह Horror Story अच्छी लगी होगी।
पढ़ने के लिए धन्यवाद।
Author: S. Mukerji
Writer’s Info: यह कहानी S. MUKERJI के द्वारा 1914 से 1917 में पब्लिश बुक INDIAN GHOST STORIES से ली गई है और इसको हिंदी में मैंने अनुवाद किया है। बिना मेरी अनुमति इसे किसी अन्य जगह किसी भी रूप में प्रस्तुत करना सख्त मना है।
Translator, Editor & Proof Reader: Vishal Suman
मुझे उम्मीद है कि आपको यह उसकी मृत पत्नी की तस्वीर (Wife Photograph) Horror Story in Hindi पसंद आई होगी। ऐसी और भी Ghost Stories in Hindi पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट पर अन्य कहानियाँ ज़रूर पढ़ें।
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