अमावस्या की रात: भूतिया पियानो (Amavasya ki Raat: Bhutiya Piano) Horror Story: कुछ जगहें ऐसी होती हैं, जिनके बारे में लोग कहते हैं कि वहाँ रात के बाद नहीं जाना चाहिए। पुरानी हवेलियाँ, सुनसान रास्ते और अधूरी कहानियाँ—सब मिलकर डर की एक अलग दुनिया बना देती हैं। यह कहानी दो लड़कियों, रिया और अनन्या की है, जो एक ऐसी ही हवेली के रहस्य को जानने निकलती हैं। जहाँ डर है, वहाँ सवाल भी हैं, और जहाँ सवाल हैं, वहाँ सच छिपा होता है।
अध्याय 1 – गर्मियों की छुट्टी और हवेली का रहस्य
रिया को हमेशा से रोमांच पसंद था। उसे ऊब से डर लगता था, और नए-नए अनुभव उसके लिए किसी जादू से कम नहीं थे। इस बार की गर्मियों की छुट्टियों में वह अपने मामा के घर गई, जो गाँव के किनारे स्थित एक पुरानी हवेली के पास था। हवेली इतनी बड़ी थी कि उसके चारों ओर घास और झाड़ियों की मोटी परतें जमा हुई थीं।
गाँव वाले अक्सर उस हवेली के बारे में बातें करते रहते थे। कहते थे कि अमावस्या की रात वहाँ भूतिया घटनाएँ होती हैं। स्ट्रीट लाइट टिमटिमाती, हवा में अजीब से शोर उठते, और लोग रात में वहाँ जाने से डरते। कुछ कहते थे कि वहाँ से रात में धीमी, रोती हुई आवाज़ें आती हैं, जिन्हें सुनकर इंसान की हड्डियाँ काँप उठती हैं।
रिया ने इन बातों को सुना, लेकिन वह हमेशा की तरह साहसी और उत्सुक थी। उसने अपनी कज़िन अनन्या को भी साथ लिया। अनन्या थोड़ी डरपोक थी, हमेशा अँधेरे और अजीब आवाज़ों से डरती थी।
जैसे ही वे हवेली के पास पहुँचीं, रात की ठंडी हवा ने उनके बालों को हिला दिया। हवेली पुरानी थी। दरवाज़े चरमराते थे, खिड़कियाँ टूटी हुई थीं, और दीवारों पर लंबे समय से जाले जमे हुए थे। कुछ खिड़कियाँ टूटी थीं, और उनमें से अजीब रोशनी छनकर बाहर आ रही थी। हवेली के दरवाज़े पर जंग लगे हुए ताले अब भी लगे थे, और दीवारों की दरारें जैसे पुराने डरावने किस्सों को छुपा रही थीं।
रिया ने कहा, “अनन्या, तुम तैयार हो न? यह सिर्फ़ देखने जाना है।”
अनन्या ने धीरे से सिर हिलाया। उसके हाथ काँप रहे थे, लेकिन उसकी जिज्ञासा भी उतनी ही तेज़ थी।
वे धीरे-धीरे हवेली की ओर बढ़ीं। जैसे ही वे नज़दीक पहुँचीं, स्ट्रीट लाइट टिमटिमाई और हवा ने अजीब से शोर किए। रिया को लगा जैसे हवेली उन्हें खुद बुला रही हो।
रिया ने धीरे से कहा, “अनन्या, तुम्हें डर लग रहा है?”
अनन्या ने फुसफुसाकर कहा, “हाँ… पर मुझे भी जानना है कि सच में क्या है।”
रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, “डर को महसूस करना साहस है, और साहस हमारे रोमांच को मज़ेदार बनाता है।”
वे धीरे-धीरे हवेली के मुख्य दरवाज़े की ओर बढ़ीं। हर कदम पर धूल उनके जूतों पर चिपक रही थी। हवा में अजीब सी खुशबू थी, जैसे पुरानी लकड़ी और मिट्टी की गंध में कोई रहस्य छिपा हो।
रिया ने अपनी टॉर्च की रोशनी से कमरे के भीतर झाँका। वहाँ का फर्नीचर टूटा हुआ था, कुछ खिड़कियाँ खुली थीं, और बाहर से आती हवा पर्दों को हिला रही थी। कमरे के बीचों-बीच एक पुराना सोफ़ा पड़ा था, जिस पर धूल की मोटी परत जमी हुई थी।
अनन्या ने काँपते हुए कहा, “रिया… लगता है जैसे कोई हमें देख रहा है।”
रिया ने उसे पकड़कर कहा, “डर मत, यह बस हवेली की पुरानी आत्माएँ हैं। हमें उनका सामना करना है।”
वे हवेली के अंदर बढ़ीं और धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठीं। सीढ़ियाँ चरमराती थीं, और फर्श पर पुराने पैरों के निशान जैसे खुद-ब-खुद बन रहे थे। हवा की सरसराहट और धूल के कण उनके चेहरे पर गिर रहे थे।
जैसे ही वे सीढ़ियाँ चढ़ रही थीं, अनन्या ने कहा, “क्या तुम्हें लगता है कि सच में भूत हैं?”
रिया ने थोड़ी गंभीर आवाज़ में कहा, “मुझे नहीं पता, पर जो भी है, हमें डर से नहीं, समझने की कोशिश से उसका सामना करना है।”
उनके कदमों की आवाज़ हवेली के भीतर गूँज रही थी। अचानक, ऊपर से एक धीमी, रोती हुई आवाज़ आई, जैसे कोई बच्ची गा रही हो। अनन्या ने रिया का हाथ और कस लिया। रिया ने देखा कि हवेली की परछाइयाँ अजीब तरीके से हिल रही थीं, जैसे वे ज़िंदा हों।
यह दृश्य रिया के रोमांच को और बढ़ा रहा था, लेकिन अनन्या के लिए यह बेहद डरावना था।

अध्याय 2 – साहस और डर के बीच
रिया ने अनन्या का हाथ कसकर थाम लिया। उन्होंने टॉर्च जलाई और हवेली के अंदर कदम रखा। हवा में पुरानी लकड़ी की खुशबू और मिट्टी की गंध घुली हुई थी। सीढ़ियाँ चरमराती थीं, और फर्श पर धूल की मोटी परत उनके जूतों के नीचे चरमराई।
अनन्या काँप रही थी। उसकी आँखों में डर साफ झलक रहा था। रिया ने धीरे से कहा, “डरना स्वाभाविक है, अनन्या, पर डर को समझना और उसका सामना करना ही साहस है।”
भीतर का वातावरण और भी रहस्यमय था। दीवारों पर पुराने चित्र झुके हुए थे। कुछ चित्रों में अजीब चेहरे बने हुए थे, जो टॉर्च की रोशनी में ज्यों-के-त्यों जीवंत लग रहे थे।
“रिया… क्या तुम्हें लगता है कि सच में भूत हैं?” अनन्या ने फुसफुसाकर पूछा।
रिया ने गंभीर होकर कहा, “मुझे नहीं पता, पर जो भी है, हमें डर से नहीं, समझने की कोशिश से सामना करना है।”
जैसे ही वे ऊपर की ओर बढ़ीं, अचानक हवेली के एक दरवाज़े की चरमराहट ने उन्हें चौंका दिया। हवा में हल्की सरसराहट और दूर कहीं से आती धीमी हँसी का मिश्रण उनके कानों में गूँजा। अनन्या ने डर से रिया के हाथ को और मज़बूती से पकड़ लिया।
वे धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ते रहे। उनके कदमों की आवाज़ हवेली के विशाल हॉल में गूँज रही थी। कभी-कभी हवा की हल्की झोंक उनके बालों को उड़ाती और पर्दों को हिला देती। हवेली की दीवारों पर अजीब दरारें थीं, और कुछ हिस्सों में दीवारों से धूल गिर रही थी।
रिया ने महसूस किया कि जैसे हवेली जीवित हो और उनका हर कदम महसूस कर रही हो। जैसे ही वे एक बड़े हॉल में पहुँचीं, वहाँ अचानक एक तेज़ हवा का झोंका आया और दरवाज़ा ज़ोर से बंद हो गया। अनन्या डर के मारे पीछे हट गई।
रिया ने उसे पास खींचा और कहा, “डर से भागना नहीं, देखना है। साहस को पकड़ो।”
हॉल में ठंडी हवा के साथ अजीब-सी फुसफुसाहटें थीं। रिया ने महसूस किया कि जैसे कोई पुरानी आत्माएँ उन्हें देख रही हों।
अध्याय 3 – अमावस्या की रात
जैसे ही रात गहरी हुई, हवेली का अंधेरा और भी घना हो गया। चाँद की धुंधली रोशनी कुछ खिड़कियों से छनकर कमरे में आ रही थी। रिया और अनन्या ने धीरे-धीरे ऊपर की ओर कदम बढ़ाए।
तभी ऊपर से तेज़ कदमों की आवाज़ आई।
“यह कौन है?” अनन्या ने काँपते हुए कहा।
पर जवाब में केवल हवा की सरसराहट थी। रिया ने देखा कि पुरानी लकड़ी की सीढ़ियाँ हिल रही थीं, मानो कोई असली इंसान ऊपर आ रहा हो।
“शायद कोई नहीं, यह हवेली की पुरानी आवाज़ें हैं,” रिया ने कहा।
लेकिन अनन्या की आँखें डर से बड़ी हो गई थीं।
उनके चारों ओर हवा की सरसराहट और अजीब आवाज़ें गूँज रही थीं। हवेली की दीवारों पर पुराने चित्रों की आँखें जैसे उन्हें घूर रही थीं। कभी-कभी कमरे की खिड़की से आती हल्की रोशनी ने उनके सायों को और भयंकर बना दिया।
जैसे ही वे हॉल के और क़रीब पहुँचीं, अचानक कमरे में धीमी, रोती हुई आवाज़ गूँजी। यह आवाज़ इतनी वास्तविक थी कि अनन्या के होश उड़ गए।
“रिया… सुनो… कोई रो रहा है,” अनन्या ने धीरे से कहा।
रिया ने उसके हाथ को पकड़कर कहा, “शांत रहो। हम देखेंगे कि यह क्या है। डर को समझना ही पहला कदम है।”
अध्याय 4 – हवेली के भीतर और पियानो की रहस्यमयी धुन
जैसे ही रिया और अनन्या एक बड़े, पुराने कमरे में पहुँचीं, अचानक वहाँ से पियानो की मधुर और रहस्यमयी धुन सुनाई दी। रिया और अनन्या दोनों चौंक गईं। पियानो अपने आप बज रहा था, लेकिन कमरे में कोई दिखाई नहीं दे रहा था।
अनन्या ने फुसफुसाया, “रिया… यह असली है। यह पियानो… अपने आप बज रहा है।”
रिया ने टॉर्च ऊपर उठाई और पूरे कमरे की खोज की। कमरे की दीवारों पर पुराने चित्र लगे थे, और एक कोने में धूल की हल्की परत के ऊपर छोटी-छोटी परछाइयाँ नाच रही थीं।
“तुम कौन हो… यहाँ क्यों आई हो?” अचानक एक कर्कश आवाज़ गूँजी।
रिया ने धीरे से कहा, “हम सिर्फ़ देखने आई हैं। कोई नुकसान नहीं करने आईं।”
धीरे-धीरे कमरे के कोने में एक छोटी लड़की की धुंधली परछाई दिखाई दी। उसका चेहरा धुंधला और ग्रे था, और वह ज्यों-की-त्यों खड़ी थी। रिया को विश्वास नहीं हो रहा था कि यह असली है।
अनन्या ने डर के मारे चिल्लाते हुए कहा, “रिया… वह हमें देख रही है!”
रिया ने उसे शांत करते हुए कहा, “डर से भागना नहीं। हमें इसे समझना है।”
हवा की सरसराहट और पियानो की धुन मिलकर कमरे में एक रहस्यमयी माहौल बना रही थीं। रिया ने महसूस किया कि यह कोई साधारण आत्मा नहीं है।
अध्याय 5 – गुंजन: एक अधूरी आत्मा की कहानी
छोटी लड़की ने अपना नाम बताया—गुंजन। उसकी आवाज़ इतनी धीमी थी कि अनन्या को विश्वास नहीं हुआ कि वह किसी जीवित इंसान की नहीं है।
गुंजन ने धीरे-धीरे अपनी कहानी सुनाई। 1989 में वह अपनी पहली पियानो परफॉर्मेंस करने वाली थी, लेकिन उसी दिन सीढ़ियों से गिरकर उसकी मौत हो गई। उसकी आत्मा शांति की तलाश में भटक रही थी। पियानो बजाना उसके लिए अधूरा सपना बन गया था। वह चाहती थी कि कोई उसकी धुन को सुने, उसकी कला को महसूस करे।
रिया ने उसकी आँखों में दर्द देखा और बोली, “हम तुम्हारी मदद करेंगे, गुंजन।”
अनन्या ने भी धीरे से सिर हिलाया।
गुंजन की आत्मा ने पहली बार उन्हें देखा और धीरे-धीरे मुस्कुराई। उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन उसकी मुस्कान में उम्मीद थी। रिया ने महसूस किया कि सच्ची मदद और साहस से किसी की आत्मा भी शांति पा सकती है।
अध्याय 6 – प्रार्थना और इंसानी रूप का चमत्कार
रिया ने हवेली के उस पुराने हॉल में खड़े होकर आँखें बंद कीं और दिल से प्रार्थना की, “हे भगवान! कृपा करो कि गुंजन को उसके सपनों की पूर्ति का मौका मिले। उसे इंसानी रूप में देखने दो, ताकि वह अपनी अधूरी धुन पूरी कर सके।”
हवा अचानक शांत हो गई। पियानो की धुन रुक गई, और कमरे में हल्की चमक फैल गई। रिया और अनन्या की साँसें तेज़ हो गईं। धीरे-धीरे धुंधली परछाई ने आकार लेना शुरू किया। वह सिर्फ़ हल्की परछाई नहीं रही; अब वह इंसानी रूप में दिखाई दे रही थी। उसकी आँखों में मासूमियत और उदासी का मिश्रण था, और चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।
रिया ने कहा, “गुंजन, देखो, सब तुम्हारे साथ हैं। आज तुम अपनी आखिरी परफॉर्मेंस करोगी।”
अनन्या ने उत्साह से कहा, “हाँ, अब तुम्हारा सपना पूरा होगा। हम तुम्हारे साथ हैं।”
रिया और अनन्या ने गुंजन को पुराने कमरे में जाकर सुंदर कपड़े पहनाए। हर चीज़ में सजीवता थी—कपड़ों की चमक, बालों की हल्की लहर, और उसकी आँखों की चमक।
हवेली के बाहर कच्ची रोड पर पियानो का इंतज़ाम किया गया। हवा ठंडी थी, और अमावस्या की रात की चुप्पी में हर धुन और साँस सुनाई दे रही थी। रिया ने गुंजन को समझाया, “हर नोट में अपनी भावना डालो। इसे अपने पूरे दिल से महसूस करो।”
अनन्या ने धीरे से कहा, “आज तुम्हारी धुन सिर्फ़ साज़ नहीं, तुम्हारी आत्मा की कहानी भी बताएगी।”
गुंजन ने गहरी साँस ली और पियानो की ओर बढ़ी। उसके हाथ जब पियानो के कीबोर्ड पर पड़े, तो ऐसा लगा जैसे हवा में संगीत और जीवन दोनों मिल गए हों।
अध्याय 7 – संगीत जो मुक्ति बना
गुंजन ने पियानो पर पहला सुर छेड़ा, और जैसे ही वह हवा में घुला, ऐसा लगा मानो हवेली की पुरानी दीवारें भी उसके संगीत से ज़िंदा हो गई हों। नोट्स इतनी मधुर और भावुक थीं कि रिया और अनन्या की आँखों में आँसू आ गए।
रात की ठंडी हवा उनके चेहरे पर हल्की सरसराहट ला रही थी, और आस-पड़ोस की खिड़कियों से लोग धीरे-धीरे बाहर आकर सुनने लगे। गुंजन की आत्मा अब केवल धुन नहीं, बल्कि एक कहानी, एक यात्रा बनकर सामने आ रही थी।
रिया ने अनन्या से कहा, “देखो, उसकी अधूरी इच्छा अब पूरी हो रही है। हर सुर में उसकी आत्मा की कहानी झलक रही है।”
अनन्या ने सिर हिलाते हुए कहा, “यह सिर्फ़ संगीत नहीं… यह उसकी ज़िंदगी की कहानी है, जो अब सबके सामने आई है।”
गुंजन ने धीरे-धीरे पियानो पर अपनी उँगलियों को चलाया। हर नोट में उदासी, आशा, दर्द और शांति का मिश्रण था। हवा में उसकी मुस्कान झलक रही थी। आस-पड़ोस के लोग भी तालियों से उसका उत्साह बढ़ा रहे थे।
धीरे-धीरे, गुंजन के हाथों की हर चाल, उसकी आँखों की चमक, और उसका संगीत एक साथ मिलकर पूरे माहौल को जादुई बना रहे थे। रिया ने महसूस किया कि गुंजन अब डर के घेरे में नहीं है; वह शांति और संतोष की ओर बढ़ रही थी।
अनन्या ने गहरी साँस लेते हुए कहा, “रिया… अब मैं समझ गई। यह डरावना नहीं है, यह सिर्फ़ एक अधूरी आत्मा की कहानी है। उसे बस अपनी पहचान चाहिए थी।”
गुंजन ने पियानो के सुरों को धीरे-धीरे समाप्त किया। हवा में उसकी मुस्कान फैल रही थी। उसकी आत्मा अब शांति की ओर बढ़ रही थी, और उसकी उपस्थिति हर किसी के दिल में रह गई।
अध्याय 8 – विदाई और शांति
संगीत के अंतिम सुरों के साथ, गुंजन ने धीरे-धीरे पियानो से हाथ हटाया। उसकी मुस्कान अब केवल चेहरे पर नहीं, बल्कि आँखों में भी झलक रही थी।
रिया ने कहा, “तुम हमेशा हमारे दिलों में रहोगी। तुम्हारी धुन और कला हमें हमेशा याद रहेगी।”
अनन्या ने कहा, “तुम्हारा सपना अब पूरा हुआ। अब तुम सच में शांति में हो।”
गुंजन ने हल्की आवाज़ में कहा, “धन्यवाद, रिया। तुमने मेरी अधूरी कहानी पूरी की। तुम सच में भगवान की भेंट हो।”
धीरे-धीरे, गुंजन की रूपरेखा हवा में हल्की चमक के साथ विलीन होने लगी। जैसे ही वह गायब हुई, हवेली के चारों ओर का माहौल बदल गया। अँधेरा अब डरावना नहीं रहा; हवा में हल्की मिठास थी, और चारों ओर की स्ट्रीट लाइट स्थिर और उजली थीं।
रिया ने अनन्या की ओर देखा और मुस्कुराई। अनन्या भी अब डर के बजाय साहस और संतोष से भरी हुई थी। दोनों ने एक-दूसरे की ओर देखते हुए महसूस किया कि कभी-कभी आत्माएँ डराने नहीं आतीं, वे सिर्फ़ अपनी अधूरी कहानी पूरी करना चाहती हैं।
हवेली के दरवाज़े और खिड़कियाँ अब शांत और स्थिर थीं। चारों ओर की चुप्पी में अब डर नहीं, बल्कि शांति और संतोष की गूँज थी। रिया और अनन्या धीरे-धीरे घर लौटीं।
रिया ने कहा, “अनन्या, आज हमने सिर्फ़ साहस ही नहीं दिखाया, बल्कि किसी की अधूरी कहानी पूरी करने में मदद की। यह हमारी ज़िंदगी का सबसे बड़ा अनुभव है।”
अनन्या ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, रिया… कभी-कभी डर केवल हमें सही दिशा दिखाने के लिए होता है।”
So I hope Guys आपको यह Horror Story अच्छी लगी होगी।
पढ़ने के लिए धन्यवाद।
Author: Smita Dhar
Writer’s Email: [email protected]
Editor & Proof Reader: Vishal Suman
मुझे उम्मीद है कि आपको यह अमावस्या की रात: भूतिया पियानो (Amavasya ki Raat: Bhutiya Piano) Real Horror Story in Hindi पसंद आई होगी। ऐसी और भी Ghost Stories in Hindi पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट पर अन्य कहानियाँ ज़रूर पढ़ें।
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