क्या राज़ है? पिशाचों का रहस्यमयी गाँव – (Kya Raaz Hai?)

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क्या राज़ है ?  पिशाचों का रहस्य्मयी गाँव  A Tale Of Fear


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मेरा अभिषेक सोलंकी(काल्पनिक) हूँ । में M. A. 2nd ग्रेड का टीचर हू और अंग्रेजी पढ़ाता हूँ। एक दिन जब में ऑफिस बैठ कर अपने स्टूडेंट्स की कॉपियाँ चेक कर रहा था। तब मेरे पास एक पत्र आया। जिस पर लिखा था कि आपका ट्रान्सफर पिशाचिन गाँव मे हो गया है। मुझे यह सब अजीब लगा कि मेरा ट्रान्सफर कैसे हो गया। मेने इसके बारे मे शिकायत की तो कमेटी ने बताया उस गाँव के टीचर का देहांत हो गया है और वहाँ एक अंग्रेजी के टीचर की जरूरत है। इसलिए तुम्हें वहां जाना होगा।

में यह सोच रहा था कि में यहाँ ठीक था ये बकवास है अब मुझे इतना दूर उस गाँव मे जाना होगा। मेने उस गाँव का नाम पहले कभी नहीं सुना था। कैसा अजीब नाम था पिशाचिन।

ख़ैर अब क्या करे जाना तो था ही मेने अपना सामान बांधा। उस समय, में बैचलर था। मेने सोचा मा पापा को कहाँ परेशान करे ख़ुद ही चला जाता हूँ। वैसे भी गांवों में आधुनिक सुविधाएं नहीं होती है। तो मा पापा शहर मे ही रह लेंगे में अकेला चला जाता हूँ, गाँव मे। horror stories.

स्कूल मे सबने मुझे Farewell दिया।

सच बताऊं तो मेरा जाने का बिल्कुल मन नहीं था। पर क्या करू जाना तो था ही।

में अगले दिन सुबह 8 बजे उस गाँव के लिए रवाना हो गया। कुछ 6 घंटे मे में वहां पहुंच गया, पर गाँव बस स्टेशन से बहुत दूर पहाडियों के बीच मे था।

साला अब एक ओर नई मुसीबत, अब ये सामान को कैसे ले के जाऊ। मुझे एक घोड़ा गाड़ी वाला दिखा। मेने उससे कहा कि भाई पिशाचिन गाँव चलोगे, वो मुझे बड़े गौर से देखने लगा। उसने कहा साहब इस गाँव मे क्या काम पड़ गया आपको। मेने कहा तुम्हें चलना है या नहीं। साहब ले जाने मे तो कोई दिक्कत नहीं पर क्या आपको नहीं लगता कि ये गाँव अजीब है। मेने पूछा क्यू भाई इस गाँव मे क्या भूत चुड़ैल रहते है। अरे नहीं साहब हंसते हुए गाड़ी वाला बोला कि साहब गाँव का नाम पर ग़ौर किया, मेरा मतलब पिशाचिन। मेने कहा क्यू भाई इस नाम मे क्या दिक्कत है। नहीं साहब हम तो बस सलाह दे रहे थे कि तनिक सतर्क रहिएगा। मेने कहा ठीक है तुम अपनी बकवास बंद करो और अब चलो। horror stories in hindi.

कुछ एक आध घंटे मे में गाँव पहुँच गया। उस घोड़ा गाड़ी वाले को मेने पैसे दिए और उस स्कूल की तरफ चल दिया। बड़ा ही अजीब गाँव था बिल्कुल सुनसान, अरे सब कहा चले गए है भाई यह सोचते हुए में चल रहा था। मुझे रास्ते मे एक आदमी मिला मेने उससे पूछा कि यहाँ पर स्कूल किस तरफ है। गाँव वाला मुझे ऐसे देख रहा था कि जैसे आज से पहले किसी इंसान को नहीं देखा हो। उसने अपनी उँगली के इशारे से बताया कि दायी तरफ गाँव से थोड़ा बाहर की ओर।

आधे घंटे मे में स्कूल पहुँच गया।

स्कूल मे केवल एक स्टाफ था जोकि एक ओर चौकाने वाली बात थी। अरे यह गाँव है या सन्नाटा।

यहा कोई रहता भी है।

उस दूसरे स्टाफ़ का नाम अमन शुक्ला (काल्पनिक) था। और वो यहाँ तीन दिन पहले ही आया था। उस स्कूल मे एक चौकीदार भी था जो स्कूल की देखभाल करता था। मुझे अमन से पता चला कि उसका भी ट्रान्सफर यहाँ तीन दिन पहले ही हुआ है। अमन विज्ञान पढ़ाता  था। उसने मुझे जो बात बताई उसे सुन कर तो में और ज्यादा आश्चर्य में पड़ गया था। उसने कहा इस स्कूल मे कोई भी बच्चा पढ़ने नहीं आता जब से में यहाँ आया हूँ कोई बच्चा तो दूर गाँव वाले भी कम ही दिखाई पड़ते है। खेर छोड़ो तुम थक गए होगे। स्कूल से थोड़ी ही दूर एक कोठी है वहां तुम्हारा आवास स्थान है। अब तुम जाऊ में तुम्हें वहाँ  शाम को मिलता हूँ। horror stories hindi urdu.

पर एक बात याद रखना  उसके पीछे मत जाना चाहे कुछ भी हो जाए।

में हैरत मे था किसके पीछे ना जाऊ यहाँ कोई परिन्दा भी है क्या। गाँव मे तो कोई दिखता नहीं।

परिंदा नहीं है जो भी है बस बोलता है मेरे पीछे आओ मेरे पीछे आओ । उसके बाद तुम कहा गए किसी को नहीं पता। में यह सुनकर डर गया।

अमन हंसते हुए बोला” अरे डर गए का हम तो तनिक मजाक करी रहे तुमसे ” ऐसा तो यहाँ का चौकीदार बोलता है। तुम चिंता ना करो। आराम करो। शाम को मिलते हैं।

में कोठी तक पहुचा। कोठी बहुत ही पुरानी थी और ऐसा लगता था मानो कि कई सालो से यहाँ कोई नहीं रुका हूँ,। में अंदर गया तो देखा कि एक खाट, एक अलमारी और एक किचन था। टॉयलेट कोठी से बाहर की ओर था। उस समय शाम के साढ़े चार बजे थे, में बहुत थका हुआ था तो मेने कमरे की हालत पर ज्यादा ध्यान न दिया थोड़ा सा खटिया को ठीक किया और सो गया। में खुद को गाँव के बाहर पाता हूँ। चारो तरफ़ अंधेरा था पर कुछ धुंधला धुंधला दिखाई दे रहा था।

मुझे एक आदमी दिखाई दिया जिसने एक बड़ा सा काले कलर का कोट पहन रखा था। में उसका चेहरा तो साफ़ नहीं देख पा रहा था। पर वह गाँव से बाहर एक पहाड़ी की ओर ही जा रहा था। में उसके पास गया और बोला भाईसाहब ये गाँव मे कोई नहीं है क्या सब कहा चले गए है। उस आदमी ने कहा मेरे पीछे आओ में बता ता हूँ कि सब कहा है और वो आगे जाने लगा, मुझे पता नहीं क्या हुआ  जो में उसके पीछे पीछे जाने लगा। पहाड़ी पर एक बड़ा सा महल बना हुआ था। वो आदमी महल मे चला गया। में भी उसके पीछे पीछे ही चल रहा था। में महल के दरवाजे के पास आके रुका। मुझे याद आया कि अमन ने कहा था कुछ। और यहाँ महल कहाँ से आ गया। Hindi Horror Stories.

में ऐसा सोच ही रहा था के तभी किसी ने मेरा हाथ ज़ोर से पकड़ा और मुझे अंदर की और खींचने लगा। में उसे नहीं देख पाया सिर्फ उसके हाथ देखे जिन पर बड़े बड़े नाखून थे। आसमान मे बिजली कड़क रही थी। मेने अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की पर वो मुझे अंदर की ओर जोरो से खीच रहा था। तभी मेरी नींद खुली सामने अमन था। वो मुझे उठा रहा था। उसने कहा कि क्या हुआ भाई, चेहरे के तोते कैसे उड़े है। कोई भूत देख लिया है क्या। मेने ज़ोर से साँस ली और कहा उससे भी भयानक।

मेने उससे सपने की सारी बात कही और बताया कि जैसा तुमने कहा था, वैसे ही उसने मुझे उसके पीछे आने को कहा और में उसके पीछे पीछे जाने लगा।

अमन हंसने लगा कि अरे ये बस तुम्हारा सपना है मेने तुम्हें जो कहा था वो तुमने सपने मे देखा that’s it ।

में भी सोचने लगा कि अमन सही कह रहा है। एक तो थकान और फ़िर जो अमन ने स्कूल मे बात बताई थी उसकी मिली जुली खिचड़ी को ही सपने में देखा होगा। में जोर से हँसने लगा कि मे भी ना क्या क्या सोचने लगा हूँ। गाँव मे आते ही……..

इतना बोलते ही मेरी नजर मेरी कलाई पर पड़ी, कलाई पर किसी के ज़ोर से पकड़ ने के निशान थे।

पर कैसे में तो सपना देख रहा था तो ये निशान कैसे पड़े। अमन बोला शायद तुमने अपने हाथ को सोते वक्त तेजी से पकड़ा होगा तो आ गए होंगे।

पर ऐसा कैसे हो सकता है……….

यह गाँव बहुत ही अजीब है जबसे में यहाँ पर आया हूँ तब से मुझे कुछ अजीब सा एहसास हो रहा है। अमन बोला अब ज्यादा परेशान ना हो। मेने भी सोचा कि शायद अमन सही कह रहा है और शायद सोते हुए ही ये निशान आ गया होगा।

अमन ने कहा ” यह सब छोड़ो चलो हम गाँव मे घूमते है।” Indian Horror Stories.

मेने कहा मुझे बहुत ही भूख लगी है, यहां तुम खाना कहाँ खाते हो।

अमन ने कहा इस गाँव मे एक फाइव स्टार होटल है और हंसने लगा।

में भी उसके साथ हंसने लगा।

अमन बोला कि खाना तो में खुद ही बनाता हूँ पर आज मेने खाना नहीं बनाया है।

में बोला कि मुझे बहुत ही भूख लगी है यहाँ आसपास कुछ खाने की व्यवस्था होगी क्या।

हा है ना  इस गाँव से बाहर एक ढाबा है वही चलते हैं.. अमन बोला।

मेने कहा ठीक है पर चलेंगे किस चीज़ से।

अमन बोला कि मेरे पास बाइक है उससे चलते हैं और हम गाँव से बाहर ढाबे की ओर जाने लगे।

रास्ते मे मेने देखा कि स्कूल के बाहर एक चौकीदार खड़ा है। जो हमे ही देख रहा था। मेने अमन से कहा ये चौकीदार दिन मे तो यहाँ नहीं था।

अमन ने कहा कि यह सिर्फ़ रात मे यहाँ आता है।

दिन मे क्यू नहीं आता यह तो मुझे भी नहीं पता।

मेने (अमन) इससे पूछा तो बोलता है कि साहब दिन से ज्यादा रात मे इस स्कूल को मेरी ज्यादा जरूरत है।

जाते हुए मेने उसके गले मे एक माला देखी थी जिस पर नींबू और मिर्ची थे।

अमन ने कहा कि जब से मे यहाँ आया हूँ मेने हर बार उसके गले मे वो माला देखी है। अरे ये गाँव के लोग बड़े ही अंधविश्वासी हैं, पूछने पर बताता है कि यह माला मेरी बुरी ताकतो से रक्षा करती है।

पर अमन भाई इस गाँव के स्कूल मे केवल हम दो स्टाफ बाकी के स्टाफ कहा गए।

अमन बोला “यह तो मुझे भी नहीं पता है।” Best Horror Stories.

गाँव इस समय भी सुनसान ही था। पता नहीं ये गाँव के सब लोग कहा गए।

हम ढाबे पर पहुचे और खाने का ऑर्डर दिया। 

थोड़ी देर मे ढाबे वाला खाना लेके आया।

ढाबे वाला बोला कि बाबूजी कहा से आए है।

मेने बताया कि ये पास ही का गाँव से। ये पिशाचिन

गाँव है ना वहा से। गाँव का नाम सुनते ही ढाबे वाले के माथे पर पसीना आ गया। पसीना पोंछते हुए बोला कि बाबूजी ये गाँव ठीक नहीं है जल्द से जल्द इस गाँव को छोड़ कर चले जाए।

अमन  बोला कि इस गाँव मे ऐसा क्या है जो हमे डरना चाहिए।

ढाबे वाला बोला “बाबूजी ये तो हम नहीं जानते कि क्या है पर जो भी है ठीक नहीं है।

इतना कह कर वो चला गया। हमने भी अपना खाना खाया और गाँव की तरफ़ निकल गये।

रास्ते मे में और अमन इधर-उधर की बाते कर रहे थे कि तभी हमारे सामने रोड़ से कोई बड़ी ही तेजी से निकल गया। अमन ने एकदम गाड़ी का ब्रेक लगाया। उसने कहा कि क्या तुमने अभी कुछ देखा है सामने। मेने कहा कि शायद कोई जंगली जानवर होगा। उस समय रात हो चुकी थी तो कुछ साफ़ भी नहीं दिख रहा था।

अमन ने गाड़ी स्टार्ट की, कि अचानक ही किसी के ज़ोर से गुर्राने की आवाज आयी। जो कोई भी था हमारे आसपास ही था। हमने देखा कि पास ही की झाड़ियों मे कोई खड़ा है और  गुर्रा रहा है। इतनी भयानक गुर्राहट मेने आज तक नहीं सुनी थी। झाड़ियों मे जो भी था अब हमारी ही तरफ़ बढ़ रहा था। Horror Stories In Hindi Indian.

मेने अमन से कहा बाइक भगा। अमन ने भी देरी ना करी और तेजी से गाड़ी भगा ली। शायद देर करता तो दोनों ना बचते। आसपास के पेड़ो पर हलचल हुई। वो जो कोई भी था पेड़ो के सहारे बड़ी ही तेजी से हमारी तरफ बढ़ रहा था। जैसे तैसे करके हम गाँव तक पहुचे। पर अब वो हमारा पीछा नहीं कर रहा था।

मेने कहा कि बाइक को स्कूल मे ले। थोड़ी देर मे हम स्कूल पहुचें। और स्कूल के कैंटीन मे जा के बैठ गए।

हमे अभी तक विश्वास नहीं हो रहा था कि हमारे साथ क्या हो रहा है। हम इतना सोच रहे ही थे कि तभी किसी ने ज़ोर से दरवाजा खटखटाया।

हम डर गए कि क्या वो यहां तक आ गया है। पर दरवाजे पर स्कूल का चौकीदार था।

हमने दरवाजा खोला। वो बोला साहब क्या बात है सब ठीक तो है ना।

हमने जो कुछ भी हमारे साथ हुआ उसे बताया पर उसने कहा कि जंगल का कोई जानवर होगा। गाँव का इलाका है साहब। आप घबराए नहीं।

उसने कहा कि अब आप जाके सो जाइये।

पर हमे नींद कहा आने वाली थी। Horror Stories Hindi.

मेने उससे पूछा कि क्या यहाँ कोई महल वहल है क्या। उसने कहा कि नहीं नहीं.. यहाँ तो कोई महल नहीं है। यहाँ क्या इस जगह के आसपास भी कोई महल नहीं है।

मेने उसकी एक बात पर गौर किया कि महल की बात सुनते ही वह हकलाने लगा था। जरूर दाल मे कुछ काला है……. 

मेने उससे पूछा कि क्या यहाँ कोई महल वहल है क्या। उसने कहा कि नहीं नहीं.. यहाँ तो कोई महल नहीं है। यहाँ क्या इस जगह के आसपास भी कोई महल नहीं है।

मेने उसकी एक बात पर गौर किया कि महल की बात सुनते ही वह हकलाने लगा था। जरूर दाल मे कुछ काला है…….

अब आगे

चौकीदार बोला साहब बहुत रात हो गयी है। अब आप जाके सो जाओ। पर याद रखना साहब कोई कही चलने की बोले तो उसके साथ मत जाना।

मैं भी काफी थका हुआ था और अमन भी। इसलिए हमने सोचा कि चल के सो लिया जाये।

मेने अमन से बोला कि मेरा जो घर है वो अभी साफ़ सुथरा नहीं है, तो क्या मैं तुम्हारे घर सो सकता हूँ।

अमन बोला कि क्यू नहीं?

अमन के घर सोने का तो बहाना था मेरी तो डर से हालत पतली हो रही थी इसलिए में अपनी कोठी मे नही जाना चाहता था। शायद अमन भी डरा हुआ था पर वो ऐसे दिखा रहा था जैसे कि उसे बिल्कुल भी डर नहीं लग रहा है।

हम दोनों उसके घर गये और सो गए, थकान के कारण जल्दी नींद भी आ गयी थी।

रात को मेरी नींद खुली क्यू कि मेने किसी को कापते हुए सुना और यह और कोई नहीं अमन था।

मेने उससे कहा क्या हो गया भाई इतना क्यों काप रहे हो। अमन कुछ बोलना चाह रहा था पर उसकी आवाज नहीं निकल रही थी।

उसने अपने हाथ से खिड़की  की ओर इशारा किया और जैसे ही मेने खिड़की की तरफ़ देखा। मेरा शरीर खौफ से जम गया। मेने बाहर देखा कि एक बड़ा ही भयंकर राक्षस खिड़की के सामने खड़ा था और बस हम दोनों को ही देख रहा था। उसके मुँह में दो बड़े ही पेने दाँत थे जिन पर खून लगा था और उसका शरीर बिल्कुल किसी चमगादड़ जैसा था। उसकी आँखों को मेने पहचान लिया था। यह वही था वो जो हमे जंगल में दिखा था। थोड़ी देर बाद वो वहां से गायब हो  गया, पर अब छत पर किसी के चलने की आवाजें आने लगी। Horror Stories Of India.

और किसी ने ज़ोर से दरवाजा खटखटाया, हम दोनों को समझते देर न लगी कि इस बार दरवाजे पर मौत खड़ी है।

वो जो भी था दरवाजा खटखटा ये ही जा रहा था और एकदम से रुक गया।

अमन और मेरा हाल बहुत ही बुरा था। थोड़ी देर बाद हमने सुना कि कोई दो लोग आपस मे बात कर रहे हैं। वो क्या बात कर रहे थे ये तो हम नहीं सुन पाये पर थोड़ी देर बाद आवाजें रुक गयी। आसपास का माहोल शांत हो गया।

फ़िर मेने हिम्मत करके अमन से पूछा कि भाई क्या हुआ था। अमन भी अब सामान्य था।

अमन बोला कि यार रात को मुझे बड़ी गर्मी लग रही थी तो मैंने सोचा खिड़की खोल दु ताकि ठंडी हवा आए। खिड़की खोल के मैं अपने बिस्तर पर जाके लेट गया और मैं खिड़की की तरफ देख ही रहा था कि तभी वो चीज़ मेरे सामने आयी। और आगे का तो तू जानता है ही।

मैं बोला यार ये गाँव ठीक नहीं है हमे तुरंत ही इसे छोड़ देना चाहिए इससे पहले की हम धरती को छोड़े।

सुबह हमने देखा कि अमन की बाइक को किसी ने तोड़ फोड़ दिया था। पर ऐसा क्यों किया होगा किसी ने। हम स्कूल की तरफ गये इसका पता लगाने और रात को जो हुआ उसका।

आज मौसम बहुत ही खराब था बरसात हो रही थीं।

हम जब तक स्कूल पहुचे तब तक पूरे भीग चुके हैं थे। आज हमे चौकीदार स्कूल मे ही मिला।

वो बोला साहब आप लोग तो काफ़ी भीग चुके हो। पर हमे भीगने की परवाह नहीं थी। अमन चिल्लाया और बोला कि यहाँ क्या हो रहा है। तुम हमे अब सब कुछ बताएगा।

चौकीदार बोला कि साहब आप बहुत बड़ी मुसीबत में फँस चुके है।

अमन बोला कैसी मुसीबत? ghost stories…

चौकीदार बोला कि……..

वो बोला साहब आप लोग तो काफ़ी भीग चुके हो। पर हमे भीगने की परवाह नहीं थी। अमन चिल्लाया और बोला कि यहाँ क्या हो रहा है। तुम हमे अब सब कुछ बताएगा। 

चौकीदार बोला कि साहब आप बहुत बड़ी मुसीबत में फँस चुके है।

अमन बोला कैसी मुसीबत?

चौकीदार बोला कि साहब आज से ठीक एक महीने पहले इस स्कूल में एक टीचर थे राजेश जोशी (काल्पनिक)। जो इसी स्कूल मैं अंग्रेजी पढ़ाते थे।

तब मुझे(अमन) याद आया कि अरे हाँ किसी टीचर का देहांत होने के कारण ही तो मुझे इस स्कूल में भेजा गया था।

चौकीदार बोला कि उस टीचर की वजह से ही यह सब घटित हो रहा है। उस टीचर को  टहलने का बहुत शौक था और वह शाम के वक्त गाँव में टहला करता था।

गाँव के लोगो ने उसे कहा था कि पहाड़ी पर एक महल बना हुआ है जिस तरफ आप मत जाना क्यूंकि वो एक शापित महल है।

क्या शापित महल, पर शापित क्यों? ऐसा क्या है वहां। अमन बोला।

चौकीदार – यह कहानी आज से लगभग 200 साल पहले की है। उस समय यह गाँव राजा इंद्रसेन की छत्र छाया मे फल फूल रहा था। सब कुछ सही था बस राजा बहुत परेशान रहता था क्यूँकि उसे कोई बच्चा नहीं था।

वह रानी से इस बात के लिए हमेशा नाराज ही रहता था। रानी की एक दासी थी मृणाली जो तंत्र विद्या और काला जादू करने मे पारंगत थी।इसके बारे में कोई कुछ नहीं जानता था सिवाय रानी के।

रानी ने मृणाली से कहा कि मेरे कोई बच्चा नहीं है महाराज भी मुझसे खुश नहीं है अगर तुम कुछ कर सकती हो तो बताओ।

मृणाली बोली कि मैं आपको बच्चा दिलवा सकती हूँ।

पर इसके लिए आपको एक किमत चुकानी होगी।

रानी बोली कि क्या किमत? तुम जो बोलोगी वो मिलेगा।

आपको इसके लिए पाँच कुँवारी कन्याओं की बलि देनी होगी। Ghost Stories In Hindi.

यह सुनकर रानी घबरा गयी। परंतु संतान के लोभ में उसने हाँ भर दी। दासी मृणाली बोली कि इसके बारे में किसी को भी पता नहीं चलना चाहिए। हमे  ठीक आधी रात में उन कन्याओं की बलि देनी होगी।

बेचारी रानी ये नहीं जानती  थी कि उसने कितनी बड़ी गलती कर दी है।

गाँव में जब 5 बच्चियाँ अचानक से गायब हो गयी तो लोगो में हंगामा मच गया। बहुत ढूंढने पर भी उनका कोई पता नहीं चल पाया। राजा ने भी अपनी बहुत कोशिस की पर कुछ भी सुराग हाथ ना लगा।

पर इधर रानी बहुत मस्त थी।

थोड़े ही समय बाद रानी को संतान हुयी। राजा बहुत ही खुश था। राजा को बेटा हुआ। राजा ने अपने बेटे के लिए पहाड़ी पर एक महल बनवाया।

राजा के बेटे के नामकरण के लिए राज ऋषि को बुलवाया गया। राज ऋषि ने जब उस बच्चे को देखा, तो वो चौक गए। उनके माथे पर चिंता की लकीर उमर आयी। जिसे राजा ने साफ साफ देख लिया।

राजा ने राज ऋषि से अकेले में पूछा कि क्या हुआ राज ऋषि जी आप इतने चिंतित क्यों है?

राज ऋषि – महाराज बात ही कुछ ऐसी है।

राजा – साफ़ साफ़ बताइये कि क्या बात है?

तब राज ऋषि ने, जो बताया उसे सुनकर राजा चौंक गया।

राज ऋषि बोले कि महाराज इंद्रसेन आपका बच्चा पिशाच योनि मै पैदा हुआ है, जिसका सीधा सा अर्थ है कि यह एक पिशाच है। पर यह अभी पूरा पिशाच नहीं बना है, पर किसी कारण वश यदि इसने खून को चख लिया, तो फ़िर इसकी प्रवृत्ति पूरी पिशाचो वाली हो जाएगी।

राजा – अवाक् होकर खड़ा था। उसे कुछ भी नहीं समझ में आ रहा था। वह बोला कि पर राज ऋषि जी मेरा बेटा ऐसा क्यों है? उसके साथ ऐसा क्यों हुआ? क्या उसे ठीक करने का कोई उपाय नहीं है।

राज ऋषि – आपका बेटा शैतान की देन है। और इसको ठीक करने का कोई उपाय नहीं है।

राजा – दुखी स्वर में.. पर ऐसा कोई क्यू करेगा?

रानी कमरे के बाहर से सब सून रही थी।

राज ऋषि ने कहा कि इस बच्चे का अंत करना होगा, वरना यह सबका विनाश बनेगा।

रानी यह सुनकर रोने लगी।

राजा और राज ऋषि उसे यहां देखकर हैरान थे… 

राज ऋषि ने कहा कि इस बच्चे का अंत करना होगा, वरना यह सबका विनाश बनेगा।

रानी यह सुनकर रोने लगी।

राजा और राज ऋषि उसे यहां देखकर हैरान थे…

..

राजा ने कहा कि महारानी आप यहाँ…

राजा इससे आगे कुछ बोले उससे पहले ही रानी बोल पड़ी कि नहीं महाराज आप मेरे बच्चे को नहीं मारेंगे

मेरा पुत्र बिल्कुल ठीक है। उसे कुछ नहीं हुआ है। Bhoot Ki Kahnai.

राजा भी बहुत दुखी था कि यह उसके परिवार के साथ क्या घटित हो रहा है?

राज ऋषि ने राजा को समझाया कि महाराज जल्द से जल्द कुछ नहीं किया गया तो फ़िर बहुत देर हो जाएगी। आपका पुत्र कहर बन कर बरसेगा जिसकी

चपेट से कोई नहीं बच पाएगी। यह एक शैतान है।

और किसी ने शैतान की पूजा करके इस बच्चे को इस दुनिया में बुलाया है।

रानी बोली नहीं नहीं महाराज मृणाली ऐसा कैसे कर ……

रानी कुछ बोलती उससे पहले ही राजा ने कहा कि क्या मृणाली? क्या किया है मृणाली ने।

नहीं महाराज हम तो कुछ और कह रहे………

राजा – महारानी साफ साफ बताए कि बात क्या है?

तब रानी ने बोला कि किस प्रकार संतान प्राप्ति के लिए उसने पांच कुँवारी कन्याओ की बलि दी।

राजा यह सुनकर अचंभित था। कि महारानी ये कैसे कर सकती है?

मृणाली को बन्दी बना के लाया जाए। राजा ने सैनिको को आज्ञा दी। थोड़ी ही देर मे मृणाली राजा के सामने थी।

राजा ने उससे कहा कि तुमने ऐसा क्यों किया?

मृणाली ने कहा ” राजा तुझे भीमा याद है”

राजा ” हाँ जिसे मेने मृत्युदंड दिया था”

कहानी में आगे बढ़ने से पहले मैं आपको बता दू कि भीमा कौन है?

दरअसल गाँव मे हरिया काका रहते थे। जो एक किसान थे। जिनके एक बहुत ही सुंदर पुत्री थी जिसका नाम सुरैया था। जैसा नाम था वैसी ही वो बहुत ही खूबसूरत भी थी। सुरैया जवान थी। उसका गोरा रंग, तीखे नैन-नक्षत्र, भरा पूरा शरीर यू कहे कि वो पूरी तरह से किसी का भी दिल मोह लेने के लिए उत्तम थी। बहुत ही चंचल थी वो। गाँव के अनेक युवा उस पर प्रेम छिड़कते थे। Chudail Ki Kahani.

ऐसे ही एक दिन की बात है जब सुरैया अपने बाबा हरिया के लिए खाना ले जा रही थी कि उस पर भीमा की काली नज़र पड़ी।

पहली नज़र में भीमा उसको चाहने लगा था। अब भीमा उसके आगे पीछे मंडराने लगा था। सुरैया को इस बात की खबर चल गयी थी। बेवक्त उसके आगे पीछे घूमना, उसे घूरना। भीमा हर संभव प्रयास करने लगा उसे पाने का पर सुरैया उसे नहीं चाहती थी।

सुरैया को उसका यू आगे पीछे  घूमना पसंद नहीं था। एक तो भीमा बहुत ही कुरूप था, क्यूँकि उसका आधा चेहरा जला हुआ था। और दूसरी बात भीमा उसे सिर्फ नोच खाना चाहता था, भीमा उसे सिर्फ गंदी हवस की नज़रों से देखता था और यह बात सुरैया जान गयी थी।

एक दिन तो भीमा ने हद पार कर दी।

सुरैया अपने बाबा के लिए खाना ले जा रही थी कि कही से भीमा आया और उसे पीछे से पकड़ के अपने साथ जंगल मे ले गया। उसका शरीर बहुत मज़बूत था सुरैया ने लाख कोशिश की पर वह उसका कुछ ना कर पायी। उसने सुरैया के जिस्म से सारे कपड़े फाड़ दिए और उस पर किसी भूखे शेर की तरह टूट पड़ा, बेचारी  सुरैया उस हैवान से अपनी आबरू ना बचा सकीं। उस हैवान ने उसे तब तक नोचा जब तक उसका मन ना भर गया।

कही किसी को इस बात का पता ना लगे, उसने सुरैया का गला दबा कर उसे जान से मार दिया। और उसका चेहरा बड़ी ही बेदर्दी से पत्थर से कुचल के वीभत्स कर दिया। उसकी इस हैवानियत को देखकर तो स्वयं हैवान भी डर जाता।

अमन और मै यह सुनकर अवाक् थे और बहुत गुस्सा भी आ रहा था। Pret Ki Kahani.

चौकीदार बोला कि भीमा सुरैया को मारकर वहां से भागा। भागते हुए वह एक बूढ़े आदमी से टकराया वो बूढ़ा आदमी और कोई नहीं सुरैया का बाप हरिया ही था। अपनी बेटे का बहुत देर इंतज़ार करने पर भी वह नहीं आयी तो वो खुद उसे ढूंढने निकल पड़ा था।

हरिया ने देखा कि जो आदमी उससे टकराया वो जंगल की और से भागकर आया था और उसके हाथो मे खून के निशान थे। जो हरिया की कमीज़ पर भी लग गये थे।

हरिया जंगल की तरफ़ गया, कुछ दूर गया ही था कि जो उसने देखा तो उसकी रूही काप गयी। वहां एक युवती का नग्न शव पड़ा जिसका चेहरा बुरी तरह से कुचला था। हरिया उसके पास गया और धक्के से दूर जा गिरा, सामने उसकी बेटी सुरैया थी। उसका यह हाल किसने किया। हरिया फुट फुट कर रो रहा था।

अब आगे……………

गांव में  यह बात आग की तरह फेल गयी। सुरैया की मौत से सब दुखी थे। सभी हरिया के पास जमा होके उसे सांत्वना दे रहे थे।

राजा को जब इस बात का पता चला तो वो भी हरिया के पास आया। राजा को भी सुरैया की मौत का दुख था। राजा भी हैरान था कि कोई इतनी  भीषण मानसिकता का भी हो सकता है क्या? Vampire Ki Kahani.

यदि राज्य में कोई ऐसा आदमी है तो उसे जल्द से जल्द पकड़ना होगा नहीं तो वो अन्य लोगो के लिए भी खतरा हो सकता है।

उस समय तक किसी को भी यह नहीं पता था कि भीमा ने सुरैया की जान किस मकसद से ली।

हरिया बोला कि जब मैं अपनी बेटी को ढूंढने निकला तो किस तरह उससे  मेरी टक्कर हुयी। और वह जंगल से ही भाग कर आया था और उसके कपड़ो पर भी खून लगा था।

जाच पड़ताल में हरिया ने भीमा के बारे मे बताया।

राजा ने सैनिको को आदेश दिया कि वे जल्द से जल्द भीमा को खोज निकाले।

बहुत दिनो तक भीमा छुपा रहा, किसी के हाथ ना लगा। पर एक रात भीमा काला कंबल ओढ़े कही भाग रहा था, शायद गाँव छोड़ने को था।

पर सुरक्षा पहरेदारों ने उसे पकड़ लिया और केद खाने मे डाल दिया।

उन लोगो को यह नहीं पता था कि वह भीमा है।

उन्होने उसे केवल रात को नगर छोड़ने के लिए पकड़ा था।

सुबह उसे राजा की सभा में पेश किया गया। Rakt Pishach Ki Kahani.

राजा ने उससे पूछा कि तुम रात को नगर से बाहर क्यो जा रहे थे? क्या तुम्हें नहीं पता कि रात को नगर छोड़ना मना है?

भीमा कुछ ना बोला।

राजा ने उससे फ़िर पूछा, पर वह तब भी चुप था।

राजा को संदेह हुआ कि कही सुरैया को इसने ही तो……….

महामंत्री जी हरिया को इस सभा में बुलाओ।

हरिया  सभा मे आया। राजा ने कहा कि इस आदमी को तुम पहचानते हो।

हरिया ने उसे पहचान लिया।

हरिया …. रोते हुए…..  महाराज यही है वो जिसे मेने वहां देखा था।

तब राजा ने भीमा से कहा कि क्या तुमने ही सुरैया को मारा है?

भीमा डर गया पर राजा समझ गया।

राजा ने भीमा से कहा अगर तुम ने नहीं बताया तो हमे और भी तरीके आते है मुँह खुलवाने के।

सैनिको इसे तब तक प्रताड़ित करो जब तक के ये अपना मुंह न खोल दे।

सैनिको ने उसे बहुत तरीकों से प्रताड़ित किया पर भीमा किसी भी तरीके से अपना मुँह ना खोला।

राजा ने सक्ति बढ़ा दी। उसे कोड़ों से बहुत मारा गया।

आखिरकार उसने अपना मुँह खोल दिया।

उसने कहा कि मेने ही सुरैया को मारा है क्योंकि उसने मुझसे प्यार नहीं किया।

मेने बस उसको इसकी सजा दी। और हसने लगा…. हा हा हा हा हा…….

राजा ने गुस्से में कहा कि इसको जाके सरे आम फाँसी दो। Darawani Kahani.

……..

                     ~~~~~~

मैं मृणाली उसकी मा, भीमा की माँ। राजा तूने मेरे बेटे को मारा। अब मैं तेरे बेटे के जरिए सबको मार दूँगी।

…. हा हा हा हा हा..

                     ~~~~~~

मैं मृणाली उसकी मा, भीमा की माँ। राजा तूने मेरे बेटे को मारा। अब मैं तेरे बेटे के जरिए सबको मार दूँगी।

…. हा हा हा हा हा..

अब आगे…

राजा ने मृणाली से कहा कि तेरे बेटे ने  हत्या की थी और उसका फल तो उसे मिलना ही चाहिए था। इसमे सिर्फ़ उसी की गलती थी। और हत्या के बदले सिर्फ मृत्युदंड मिलता है यही इस राज्य का न्याय है। पर तुमने जो मेरे बेटे के साथ किया है उसकी सजा तो तुम्हें जरूर मिलेगी। सैनिको इसे बंदीगृह में डाल दो।

इसकी सजा का फैसला अगले दिन किया जाएगा। Bhediye Ki Darawani Kahani.

  ~~रात का समय मृणाली बंदीगृह में~~

राजा तू नहीं जानता कि अभी तेरे ऊपर और तेरे लोगो पर क्या मुसीबत आने वाली है। हाहा….

      ~ राजा का कक्ष ~

राजा और राज ऋषि जी आपस में बाते कर रहे हैं।

राजा – राज ऋषि में बहुत चिंतित हूँ। अपने बच्चे के लिए भी और इस राज्य के लोगो के लिए भी।

राजा यह चिंता करने का समय नहीं है। हमे जल्द से जल्द इस शैतान रूपी बच्चे का अंत करना होगा।

राज ऋषि बोले..

….

उधर मृणाली अपनी तंत्र विद्या से सब सून रही थी।

हाहा राजा तुझे अभी मेरा असली खेल नहीं पता है अभी तो तुझे खून के आंसू रोना है।

महल में….

राज ऋषि महाराज चलिए हमे आज ही उस शैतान बच्चे का अंत कर देना चाहिए।

राजा( दुखी स्वर में) ठीक है राज ऋषि जी जैसा आप कहे।

दोनों उस कक्ष की ओर बढ़ते हैं जहाँ पर वह बच्चा था।

कक्ष में प्रवेश करते ही वह चौक जाते है क्योंकि वह बच्चा वहां नहीं होता है।

राजा अरे! यह नहीं हो सकता बच्चा तो यही इसी कक्ष में था। फिर कहाँ चला गया?

राज ऋषि- कही रानी ने तो यह सब नहीं किया है।

राजा गुरुवर हमे चलकर देखना चाहिए।

दोनों जाने ही वाले थे कि तभी राज ऋषि जी ने खिड़की पर किसी की परछाई देखी। वह वहा जाकर देखने लगे पर वहां कोई नहीं था।

राज ऋषि, शायद मेरा भ्रम है पर वहा कोई तो था।

उधर  रानी के कक्ष में पहुचकर  दोनों देखते हैं कि रानी तो अपने बिस्तर पर सो रही थी।

राजा रानी को उठाता है। थोड़ी ही देर में रानी उठती है और राजा को देखकर पूछती है महाराज आप यहाँ इतनी रात गए।

… राजा के समीप ही राज ऋषि जी भी खड़े थे।…

महाराज कुछ हो गया है या कोई अनहोनी तो नहीं हो गयी है। बात क्या है महाराज?

राजा बोला कि महारानी क्या आप अभी अपने बच्चे के पास गयी थी। राजा ने गुस्से में कहा..

रानी नहीं महाराज हम तो यहाँ कब से सो रहे थे हम हमारे बच्चे के पास नहीं गए। Haunted Stories.

राजा समझ गया कि रानी झूठ नहीं बोल रही है।

राजा राज ऋषि से बोला कि गुरूवर वो बच्चा आखिर कहां गया होगा।

हमे उसे ढूंढना होगा नहीं तो.. अनर्थ.. राज ऋषि ने कहा।

उधर  मृणाली ने अपनी तंत्र विद्या से पहरेदारों को अपने वश में किया और कैदखाने से भाग निकली।

उधर राजा, राज ऋषि और कुछ सैनिक कैदखाने में पहुँचते हैं। वहाँ पर सब सैनिक बेहोश पड़े थे और जैल का दरवाजा खुला हुआ था।

मृणाली भाग गयी महाराज। राज ऋषि ने कहा।

राजा ने सैनिको को आदेश दिया कि वे जल्द से जल्द

मृणाली को ढूंढें। वो ज्यादा दूर नहीं गयी होगी।

सैनिक नगर का चप्पा चप्पा छान मारने लगे पर किसी को भी मृणाली का कोई पता नहीं लग रहा था ।

उधर राजा और राज ऋषि दोनों बड़ी ही चिन्ता में थे क्योंकि शैतान बच्चा आखिर कहा चला गया, अगर वो जल्दी ना मिला तो घोर संकट आने वाला था। Scary stories in Hindi.

           ~~जंगल का दृश्य~~

मृणाली उधर जंगल में चली जा रही थी और किसी चीज़ को ढूंढ रही थी।

पास ही में एक गुफा थी, जिसकी तलाश वह कर रही थी।

मृणाली गुफा में पहुँचती है। वहा का दृश्य वैसा ही होता है जैसा कि आम भूतिया फिल्मों में होता है। चारो तरफ़ इंसानी हड्डियां फेल रखी है, भयंकर और बड़े बड़े मकड़ियों के जाले, एक बड़ी सी बलि देने की जगह जहाँ पर एक बड़ी नोकदार दात्री ( दराती ) जिस पर लगा सूखा लाल खून। यह वही जगह है जहाँ रानी के बच्चे के लिए पाँच कुँवारी कन्याओं की बलि दी गयी थी।

मृणाली कुछ मंत्र पढ़ती है और एकदम से उसके हवन करने वाली जगह पर आग जल उठती है।

थोड़ी देर बाद किसी के पैरो की आवाज आने लगती है, आवाज धीरे धीरे मृणाली की तरफ़ बढ़ती है।

सामने एक लंबा चौड़ा दानव आकर मृणाली के सामने खड़ा हो जाता है। जिसके एक हाथ मे राजा का बच्चा होता है और दूसरे हाथ मे बड़ी भयंकर सी तलवार होती है।

अब वह उसकी तरफ बढ़ने लगता है और बच्चा उसको दे देता है।

शाबाश.. मेरे बेटे, तूने अपना काम कर दिया।

जी हाँ, आपने बिल्कुल सही सुना, वो दानव  और कोई नहीं बल्कि उसका मृणाली का ही बेटा भीमा होता है।

पर भीमा तो मर चुका था ना। तो वो कैसे दरअसल मृणाली ने अपनी तंत्र विद्या से ही उसको भीमा को जिंदा किया है पर अब वो इंसान नहीं बल्कि एक शैतान के रूप है। उसका शरीर में शैतान का वास है और ये शैतान ऐसा वैसा शैतान नहीं बल्कि खून पीने वाला एक पिशाच है। Creepy Stories In Hindi.

……………………

चौकीदार अमन और मुझसे बोलता है कि साहब जिसे आपने जंगल मे देखा था और जो रात को आपके घर आया था वो पिशाच यही है। सदियों से ये लंबी नींद सोया था पर अब ये जग गया है।

अमन बोला पर कैसे?

चौकीदार अमन और मुझसे बोलता है कि साहब जिसे आपने जंगल मे देखा था और जो रात को आपके घर आया था वो पिशाच यही है। सदियों से ये लंबी नींद सोया था पर अब ये जग गया है।

अमन बोला पर कैसे?

यह जानने से पहले यह जाने कि आगे गांव का क्या हाल हुआ और इस महल की सच्चाई क्या है?

चौकीदार बोला..

मैं( लेखक अभिषेक सोलंकी) भी यही तो जानना चाहता था कि इस महल की सच्चाई क्या है और राजा के बेटे का फिर क्या हुआ?

कहानी में वापस लौटते हुए……

चौकीदार बोला कि

उधर पूरे नगर में राजा अपने सैनिकों के साथ मृणाली और उस शैतान बच्चे को ढूंढने में लगा हुआ था।

                ~~~~~~~

मृणाली की गुफा…

मृणाली अपनी गुफा में एक शैतान की मूर्ति के सामने बैठी है। उसके एक तरफ राजा का बच्चा है। वो उस शैतानी मूर्ति की पूजा कर रही है। थोड़ी देर बाद मूर्ति में हलचल होती है और मूर्ति  में से एक भयानक आवाज आती है।

मुझे किसने बुलाया और क्यों?

मृणाली उसके सामने झुक कर बोलती है कि शैतानों के शैतान मेरे आका मैं आपकी दासी मृणाली हूं।

शैतान बोलता है कि क्या चाहिए तुझे?

मुझे यहां किस लिए बुलाया है।

वह कहती है कि शैतानों के शैतान मैं आपकी दासी  मृणाली आपसे चाहती हूं कि आप मेरे बेटे भीमा को और ताकतवर कर दें, जिससे कि वह राजा और गांव वालों से बदला ले सके।

भीमा भले ही मर कर जिंदा हो गया था और उसके अंदर शैतान था पर अभी भी उस में इतनी ताकत नहीं थी कि वह किसी को मार सके या उससे लड़ सके।

शैतान मूर्ति बोलती है कि इसके लिए तुझे एक बलि देनी होगी क्योंकि एक आत्मा लेकर ही मैं तेरे बेटे को वह ताकत दे सकता हूं जिससे कि वह अपने दुश्मन को हरा सके। Spooky Stories In Hindi.

वह बोलती है कि जी आका और दराती (दात्री) उठा के राजा के बेटे का सिर काट डालती है और उसके सिर को शैतान के पैरों पर रख देती है।

………

(पर राजा का बेटा तो खुद ही शैतान था और सारी समस्या का कारण भी तो वही था तो  कहानी का यह मोड़ कैसा? दरअसल राजा का बेटा शैतान नहीं था। रानी को संतान भी मृणाली के जादू के कारण नहीं हो पा रही थी।

यह सब मृणाली का रचा गया षड्यंत्र था। उसने यह सब षड्यंत्र रचा था और जानबूझकर रानी की दासी बनी और उसे संतान का लोभ दिया। राजा का बेटा पिशाच योनि में भी  पैदा नहीं हुआ था। हां बस उसके ऊपर पिशाच का साया जरूर था। यह सब उसका जादू था जिससे यह लगे कि यह बच्चा एक शैतान है।  राजा का बेटा बिल्कुल निर्दोष था। मृणाली ने यह सब राजा से अपना बदला लेने के लिए किया था।

राज ऋषि जी भी इस जगह मात खा गए। उनकी विद्या ने भी उन्हें का साथ नहीं दिया, वह जिसको शैतान का बच्चा समझ रहे थे वह तो बस एक निर्दोष बच्चा था) Khaufnak Kahaniya.

                                                 ………………..

शैतान  मृणाली से खुश हो जाता है और वहां से गायब हो जाता है।

…. और अब असली खेल शुरू होता है।

उधर भीमा का शरीर गलने लगता है और उसके दोनों हाथ बहुत ही लंबे और लचीले हो जाते हैं। उसके एक हाथ में बड़ी-बड़ी तीन अंगुलियां उत्पन्न हो जाती हैं तथा दूसरा हाथ एक हतोड़े का आकार ले लेता है। दोनों पैरों की जगह आठ पतली पतली टांगे आ जाती है। (किसी ऑक्टोपस की तरह)।  पीठ पर दो पंख।

चेहरे के बीचोबीच एक बड़ी सी आंख और एक बड़ा सा मुंह, जिसमें बड़े-बड़े दाँत  और सिर पर दो बड़े से सींग। पूरी तरह नरक के राक्षसों को भयभीत कर दे, इस तरह का कोई प्राणी बन चुका था  वो।

भीमा खुद को शीशे में देखता है खुद का ऐसा भयानक रूप देख वह आग बबूला हो जाता है।

उसने आशा नहीं की थी कि वह कुछ इस तरह का हो जाएगा ।

गुस्से में, वह मृणाली को जोर से धक्का मार देता है जिससे वह दूर जा गिरती है।

अब भीमा पर किसी का भी नियंत्रण नहीं था।उसको तो बस एक काम याद था बदला।

                    ~~~~~  

……. रात का समय

(राज नगर के दरवाजे पर)……..

कुछ सैनिक मुख्य दरवाजे पर पहरेदारी कर रहे हैं। कुछ सैनिक राजनगर के दरवाजे से बाहर की तरफ पहरेदारी कर रहे हैं।

राजनाथ (सैनिक) – अरे भाई! उस दासी मृणाली का कुछ पता चला। पता नहीं कहां चली गई?

चलो भाई, तुम लोग यहां पर पहरेदारी करो, मैं अभी हल्का होकर आता हूं।

हू हू हू……..   हू हु हु……. आह…श…

अरे ये क्या? ये सामने क्या???………….. आह….

…. आह आह…

पहरेदार की चीख सुनकर बाकी पहरेदार वहाँ जाके देखते है कि क्या हो गया?

वहां पर उस सैनिक के शरीर के टुकड़े-टुकड़े इधर उधर पड़े थे। Bhutiya Kahani Hindi Mein.

यह देख कर सब डर जाते हैं और वहां से भागते हैं कि तभी पीछे से जोड़ की दहाड़ की आवाज आती है और देखते ही देखते सभी सैनिकों को भीमा (राक्षस) जान से मार डालता है। 

और अपने हथोड़ा रूपी हाथ से दरवाजे के टुकड़े-टुकड़े कर देता है।

अब वह महल की ओर बढ़ता है। जो भी उसके रास्ते में आता है वह सब को मार डालता है।

वह महल के दरवाजे पर पहुंच जाता है जहां के पहरेदार पहले ही उसे देख कर भाग गए थे। जिन्होंने उसे रोकने की कोशिश की उन सब का भी वही हाल हुआ जैसा दरवाजे के पहरेदारों का हुआ था।

                      ~~~~~~~       

दरवाजा तोड़कर भीमा रानी के कक्ष में पहुंच जाता है शोर सुनकर रानी उठ जाती है। सामने उसको देखकर चीखती है तभी भीमा (राक्षस) अपने हाथ के प्रहार से रानी के शरीर के तीन टुकड़े कर देता है।

रानी को मार कर भीमा राजा  को मारने के लिए निकलता है।

     ~~उधर सूर्योदय होने ही वाला था~~

भीमा (राक्षस) सूर्य की रोशनी में अस्तित्व हीन था। सूरज की रोशनी पड़ते हैं उसका शरीर जल उठता, इसलिए भीमा महल छोड़ कर भाग जाता हैऔर जंगल में जाकर छिप जाता है।

उधर महल में अफरा-तफरी मची थी। राजा जब रानी के कक्ष में पहुँचता हैं तो रानी का क्षत विक्षत शरीर देखकर स्तब्ध हो जाता है। राजा कुछ भी नहीं समझ पा रहा था कि उसके परिवार के साथ यह सब क्या हो रहा था?

राजा ने सभी विशेष अधिकारियों की एक सभा बुलाई। सभी में गंभीर बहस होती है और कोई भी इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाता कि यह शैतान कहां से आया?

तभी राज मंत्री बोलता है कि इसका जवाब तो अब केवल मृणाली ही दे सकती है। 

अभी तक आपने पढ़ा कि किस तरह अभिषेक और अमन पिशाचिन गांव में फंस चुके है |

और चोकीदार उन्हें उस शैतान की कहानी सुनाता है | Dayan Ki Kahaniya.

कैसे मृणाली अपने बेटे भीमा की मौत का बदला राजा और रानी से लेती है ? किस प्रकार से मृणाली शैतान को राजा के बेटे

की बलि देती है | कैसे भीमा एक भयानक से शैतान में बदल जाता है और रानी को मार देता है |

अब आगे …….

पर मृणाली कहां है? इसका पता तो किसी को भी नहीं है / मनाली जिंदा है या मर गई? क्या पता राजा ? कहता है|

तब राज मंत्री बोलता है कि राज ऋषि जी को बुलाया जाए वही बता सकते हैं कि मृणाली कहां होगी ?

(दोस्तों जैसा कि आपने पिछले भाग में पड़ा है कि किस प्रकार से मृणाली राजा के बेटे की बलि देती है मृणाली ने किस प्रकार से छलका प्रयोग करके राजा के बेटे को पिशाच या शैतान का बेटा साबित कर दिया था और इस जाल में राज्य ऋषि जी भी फंस गए थे मानना पड़ेगा मृणाली राजऋषि जी से कहीं गुना ज्यादा मायावी और ताकतवर है अब तक राज ऋषि जी को इस बात का पता नहीं है कि राजा का बेटा शैतान नहीं था और यहां तक कि मृणाली राजा के बेटे की बलि दे चुकी है पिछले भाग में आप ने यह पढ़ा होगा )

….. राजऋषि जी दरबार में पहुंचते हैं उनके साथ में एक बहुत ही हट्टा कट्टा नौजवान भी होता है राजा दुखी स्वर में बोलता है कि ऋषि जी हम पर घोर संकट आन पड़ा है वह मायावी बच्चा पुरे राजनगर पर कहर की तरह बरस पड़ा है

(राजा को अब तक इस बात का पता नहीं है कि वह जिस शैतान को उसका बच्चा समझ रहा है ,वह असलियत में मृणाली का बेटा भीमा है)

(राज ऋषि उस समय नगर में नहीं थे ,जिस समय भीमा ने नगर पर हमला किया था दरअसल ,वो उस समय अपने गुरु ऋषि ज्ञानेश्वर जी के पास गए हुए थे क्योंकि उनके गुरु जी बड़े ही पहुंचे हुए साधु संत थे राज ऋषि जी को मृणाली का पता मालूम करना था साथ ही में राजा के बेटे का भी)

राज ऋषि जी बोलते हैं कि महाराज इसी संदर्भ हेतु मैं अपने गुरु जी के पास गया हुआ था ताकि मृणाली का और आपके बेटे का पता लग सके उस समय मेरे गुरुजी अपनी ध्यान साधना में लगे हुए थे इस कारण मुझे थोड़े समय वहां पर रुकना पड़ा

पर एक दिन वह मेरे सपने में आए और बोले कि मैं जानता हूं कि तुम किस लिए यहां आए हो चिंता मत करो तुम मेरे शिष्य मृत्युंजय के साथ जाओ वह बहुत बलशाली और बुद्धिमान है तुम उसे सारी बात बता दो. Rakshas Ki Kahaniya.

बस महाराज यही कारण है कि मुझे यहां से अपने गुरु के पास जाना पड़ा.

…. उधर रात होने में बस कुछ ही प्रहर बाकी रह गए थे…

सभी इस बात से परेशान हो गए क्योंकि रात होने वाली थी और रात में फिर वही मौत का खेल शुरू होगा

मृत्युंजय वहां पर बिल्कुल शांत खड़ा था…

थोड़ी देर बाद वह बोलता है कि राजा मुझे आप उस शैतान के बारे में पूरी बात बताए और हां रात से उसका क्या संबंध है इसके बारे में भी बताइए..

राजा उसको पूरी बात बताता है…

मृत्यु से तुरंत एक योजना तैयार कर लेता है वह राजा से बोलता है कि वह शैतान आपको मारना चाहता था और आज भी वह आपको ही मरना के लिए आएगा..

आप को मार कर शायद बाद में वह पूरे नगर को भी मार दे हमें सबसे पहले नगर को खाली करवाना होगा और सब को एक सुरक्षित जगह पर भेजना होगा साथ ही में मुझे कुछ सैनिक चाहिए राज नगर के बीचोंबीच एक जाल बिछाने के लिए ताकि जिससे हम उस शैतान को जाल में फंसा सके.

जैसे ही नगर वासियों को कहा जाता है कि सुरक्षित ठिकानों पर चलो वैसे ही सब तुरंत निकल पड़ते हैं न कोई सवाल न कोई जवाब सबको पता था कि अगर रुके तो वह राक्षस अवश्य मार देगा पूरा गांव खाली हो जाता है नगर के रास्ते में एक बड़ा सा गड्ढा खुदवाया जाता है गड्ढे के अंदर बहुत सारे नुकीले भाले लगाते हैं और गड्ढे के बीचोबीच एक छतरीनुमा पट्टा बनाया जाता है जिस पर कोई खड़ा हो सके और उस पट्टे तक पहुंचने के लिए एक सेतु पुल तैयार किया जाता है पूरे गड्ढे में ज्वलनशील तेल भर दिया जाता है. Pretni Ki kahani.

योजना यह थी कि राजा उस पट्टे पर खड़ा होगा और जैसे ही वह राक्षस वहा आएगा वह कच्ची लकड़ियों पर पैर रखने से सीधा नीचे गिरेगा और भालो के द्वारा घायल हो जाएगा और राजा के तुरंत वहां से निकल जाने के बाद उस पूरी जगह पर आग लगा देंगे और वह शैतान वही जल के मर जाएगा.

योजना बहुत अच्छी है ….राजा कहता है पर यदि योजना में कोई चूक हुई तो…..

मृत्युंजय बोलता है कि इसके अलावा हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है.

पर शैतान को वहां तक लाएगा कौन किस में इतना साहस है राजा कहता है.

यह काम भी मृत्युंजय अपने ऊपर लेता है.

तभी राज दरबार में सैनिक एक औरत को अंदर ले कर आते हैं यह औरत और कोई नहीं बल्कि मृणाली होती है, असल में मृणाली खुद चलकर राजा के पास आई है.

राजा उससे पूछता है कि क्या लेने आई है यहां तेरा इतना साहस क्या तुझे मौत से डर नहीं लगता.

मृणाली कहती है कि महाराज मुझे इसकी कोई चिंता नहीं है मुझे क्षमा कर दीजिए मुझे मेरे बेटे भीमा के आगे कुछ दिखा ही नहीं.

राजा बोलता है कि तूने मेरे बेटे के साथ यह क्या किया उसे राक्षस बना दिया है तुझे इसकी सजा मिलेगी.

तुझे अभी फांसी की सजा देंगे.

मृत्युंजय समझ जाता है कि मृणाली कुछ जानती है और वह राजा को बताना चाहती है.

मृत्युंजय बोलता है कि महाराज हमें इसकी बात एक बार जरूर सुन लेनी चाहिए.

तब मृणाली राजा को सब बात बताती है कि किस तरह उसने अपने मायाजाल से यह खेल रचा जिसमें सब बस फंस गए और किस तरह भीमा एक राक्षस बन गया.

(कुछ पाठकों को का यह सवाल होगा की प्मृणाली में इतना परिवर्तन कैसे आ गया वह तो बदला लेना चाहती थी इसका जवाब आगे कहानी में ही मिलेगा.)

मृणाली कहती है कि महाराज आपका बेटा शैतान नहीं था उसका यह हाल तो मेरी वजह से हुआ था वह राक्षस आपका बेटा नहीं बल्कि भीमा है पर अब वह भीमा भी नहीं रहा उसके अंदर नरक का एक शैतानी पिशाच आ गया है जिसे मैंने आपके बेटे की बलि देकर जगाया है. Werewolf ki Kahani.

अपने बेटे की बलि की बात सुनकर और उसके निर्देश होने की बात सुनकर राजा आश्चर्यचकित हो जाता है उसे यह समझ नहीं आता कि वह अपने भाग्य पर गुस्सा करें या रोए.

मृणाली करती है कि मैंने पहले रानी की मदद से पांच कुँवारी कन्याओं की बलि दी और भीमा को जिंदा किया.

महाराज में तो बस आपसे बदला लेना चाहती थी मुझे नहीं पता था कि वह रानी को भी मार देगा.

वह भीमा नहीं है.

(असल में जो राक्षस भीमा के अंदर है वह दरअसल शुरू से ही मृणाली को धोखा दे रहा था वह धीरे धीरे भीमा के शरीर पर अपना कब्जा कर रहा था और जब मृणाली ने राजा के बेटे की बलि दी तो उस नरक के शैतान को और भी ज्यादा ताकतवर कर दिया.

//. कुछ लोग इस बात से कंफ्यूज हो सकते हैं कि जब भीमा ने खुद को आईने में देखा तो वह क्रोधित हो गया और उसने मृणाली को धक्का देकर एक तरफ फेंक दिया था यदि उसके अंदर वह शैतान है तो वह क्रोधित कैसे हो गया जबकि वह तो राक्षस है इसका जवाब मैं आपको बता देता हूं दरअसल शैतान अभी तक भीमा के शरीर पर पूरी तरह से कब्जा नहीं कर सका है .//

अब वह शैतान राजा को इसलिए मारना चाहता है क्योंकि राजा और नगर के लोग उसकी असलियत जानते हैं अगर वह इन्हें मार दे तो फिर कोई उसे परेशान करने वाला नहीं बचेगा और फिर शैतान इस दुनिया में आजाद घूम सकता है और अपनी दहशत फैला सकता है)

राजा चुपचाप अपने सिंहासन पर बैठा था और अंदर ही अंदर दुखी था क्योंकि ना तो अब उसका बेटा है और ना ही उसकी रानी जिंदा है राजा निराश होकर राज दरबार से अपने कमरे की तरफ चला जाता है.

मृत्युंजय इस बात को समझ जाता है और उसके पीछे पीछे उसके कमरे में चला जाता है और राजा को समझाता है कि महाराज यह वक्त निराश या दुखी होने का नहीं है आप यहां के राजा है और आप के ऊपर इस पूरे नगर की जिम्मेदारी है इसलिए आपको अपने सैनिकों और प्रजा को हिम्मत बंधानी होगी. Dil Ko Dahla Dene Wali Kahaniya.

राजा मृत्युंजय से बोलता है कि तुम ठीक कहते हो हमें उस शैतान से अपनी प्रजा की रक्षा करनी होगी.

इसी बीच मृणाली उस कमरे में पहुंचती है.

पहले तो वह राजा से क्षमा मांगती है फिर कहती है कि महाराज आप इस शैतान को भले ही घायल कर दे या उसके टुकड़े-टुकड़े कर दे या उसे जला दे पर वह शैतान मर नहीं सकता वह जिस काल घड़ी में इस संसार में आया है वह इसी काल घड़ी में यहां से जा पाएगा जो आज ठीक दो सो साल बाद आएगी हमें उसके शरीर को तब तक असक्रिय रखना होगा जब तक कि वह काल घड़ी आ न जाए तभी उस शैतान का अंत संभव हो सकता है

जब वह उस काल घड़ी में उठेगा तो उसके सीने में हमें तीन धार वाला हथियार घुसाना होगा और उसके दिल को बाहर निकाल कर जला देना होगा इसी से उसका अंत हो सकता है और किसी चीज से नहीं

….. रात होने में अब थोड़ा ही समय बचा था नगर के दरवाजे पर राजा के बहुत सारे सैनिक और मृत्युंजय भी उनके साथ उस शैतान का इंतजार कर रहा था सभी की आंखों में शैतान की दहशत साफ नजर आ रही थी सिवाय मृत्युंजय के, मृत्युंजय के हाथ में एक बड़ा सा त्रिशूल था जिसे स्वयं उसके गुरुजी संत ज्ञानेश्वर जी ने दिया था इसका मतलब ऋषि ज्ञानेश्वर सब जानते हैं कि उस शैतान का अंत किस प्रकार से होगा …

..

तभी एक जोर की दहाड़ की आवाज आती है……

कुछ सैनिक चीख चिल्ला रहे थे

बचाओ… बचाओ… बचाओ….

मृत्युंजय कहता है कि यह आवाज तो पश्चिमी दरवाजे से आ रही है सभी पश्चिमी दरवाजे की तरफ चलो…..

मृत्युंजय वहां पहुंच कर देखता है कि वह राक्षस कुछ सैनिकों का खून पी रहा था कुछ सैनिक उससे बचकर मृत्युंजय की तरफ भाग रहे थे चारों तरफ सैनिकों की कुचली हुई लाशें पड़ी हुई थी. Khaufnak Bhooto Ki Kahani.

मृत्युंजय यह देख कर आश्चर्यचकित हो उठा था उसने उस जैसे राक्षस को अपनी पूरी जिंदगी में कभी नहीं देखा था मृत्युंजय अपनी त्रिशूल उठाता है और उस राक्षस की तरह दौड़ता है तभी वह राक्षस अपना एक हाथ लंबा करके उसकी तरफ जोर से बढ़ाता है और उसे दूर धकेल देता है.

जिन सैनिकों को वह खून चूस रहा था वह भी अब एक-एक करके उठने लगते है पर अब वो इंसान नहीं थे वह भी उस राक्षस की तरह ही खून पीने वाले दरिंदे बन चुके थे जो अब बाकी बचे सैनिकों की तरफ बढ़ रहे थे.

यह देखकर सब सैनिक अपनी जान बचाकर वहां से भागने लगे.

कुछ सैनिको को दरिंदे अपनी खुराक बना चुके थे जिन्हें भी वह काट रहे थे वह भी उनके जैसे ही बनते जा रहे थे.

मृत्युंजय यह सब देख कर समझ गया कि जैसे ही यह काटते हैं शैतान का कुछ अंश इनमें समा जाता है और यह सब भी शैतान की तरह ही बन जाते हैं.

मृत्युंजय ने अपना त्रिशूल उठाया और उन दरिंदों को मारने लग गया पर जब भी वह उन्हें मारता, वो फिर से जिंदा हो जाते थे.

मृत्युंजय अपना त्रिशूल घूमता है और एक के सीने में दे मारता है जिससे वह दरिंदा वही मर जाता है अब मृत्युंजय को समझ आ गया था कि उनके दिल पर वार करने से ही ये मरेंगे.

वह सबको धीरे-धीरे खत्म कर देता है.

मृत्युंजय, अब शैतान की तरह बढ़ता है.

शैतान उसकी तरफ फिर से अपना हाथ बढ़ाता है पर इस बार मृत्युंजय अपने त्रिशूल से उसके हाथ को फाड़ डालता है.

वो शैतान जोर से दहाड़ता है और उसकी तरफ दौड़ने लगता है.

मृत्युंजय को बस इसी पल का इंतजार था वो शैतान को उस जाल की तरफ ले जाता है.

उस गड्ढे (जाल) के ऊपर बने पट्टे पर राजा खड़ा होता है जाल को पूरी तरह से ऐसे बना दिया जाता है कि जैसे ही वह शैतान वहां पहुंचे जाल के ऊपर रखी कच्ची लकड़ियां टूट जाएगी और बाद में जैसे ही शैतान जाल में फंसेगा ज्वलनशील तेल में आग लगा दी जाएगी.

जैसे ही शैतान वहां पहुंचता है मृत्युंजय एक तरफ खड़ा होकर, उसे अपनी तरफ आने की चुनौती देता है कि.. दम है तो इधर आ.. पर शैतान को इसमें कुछ गड़बड़ी लगती है और वह वहां से भागने लगता है पर तभी पीछे से एक आवाज आती है.

भीमा मेरे बेटे इधर आओ मैं तुम्हारी मां मृणाली.

यह सुनकर शैतान का भीमा पर असर कम पड़ने लगता है और वह मृणाली के पास जाने लगता है मनाली उसे अपनी तरफ बुलाती है.

जैसे ही वह मृणाली के पास पहुंचता है मृणाली उसकी आँख में एक चाकू घोंप देती है जिससे वह शैतान तिलमिला उठता है मृणाली वहां से भागने लगती है और जाल के पास आते हैं एक तरफ हट जाती है और वह शैतान जाल में फस जाता है और नीचे लगे भालो पर जा गिरता है पर वह मृणाली का पेर पकड़ लेता है जिसे वो भी उन भालो पर जा गिरती है और वही मर जाती है.

उधर शैतान दर्द से कराह रहा था और राजा पट्टे से हटता है और मृत्युंजय तभी एक मशाल लाकर उस जाल में फेंक देता है जिससे पूरे जाल में आग लग जाती है और शैतान वही जल जाता है. Dayan Aur Rakshash Ki Kahani.

जलते वक्त वह बहुत ही तेजी से दहाड़ता है और कहता है कि मुझे कोई नहीं मार सकता.

….. सुबह होने लगती है……

अब वह शैतान पूरी तरह जल चुका था पर अभी शैतान का अंत नहीं हुआ था उसके मरने की काल घड़ी तो उस समय से दो सो साल बाद है.

सभी सैनिक और प्रजा मृत्युंजय की जय जयकार कर रही थी.

थोड़ी देर बाद संत ज्ञानेश्वर जी वहां पदार्थ हैं सभी उनको नमन करते हैं.

वह मृत्युंजय को देखते हैं और उनकी आंखों में देखकर मृत्युंजय समझ जाता है कि क्या करना?

वह राजा से बोलता है कि हमें इसके शरीर को कही सुरक्षित दफनाना होगा ताकि यह शैतान फिर न उठ पाय.

राजा कहता है कि मैंने अपने बेटे के लिए एक महल बनवाया था जो पहाड़ी पर बना है क्यों ना हम इसे वही दफना दे.

तभी सभी संत ज्ञानेश्वर जी बोलते हैं कि दफ़नाने से कुछ नहीं होगा इसे एक विशेष काल घड़ी में ही मारा जा सकता है जो आज से लगभग दो सो साल बाद है यदि इसी बीच इसने खून चख लिया तो यह फिर जीवित हो उठेगा उस विशेष काल घड़ी में इसके सीने में इस त्रिशूल को घुसाना होगा जिससे ही यह मार सकेगा और नरक में पहुंचेगा अन्यथा और किसी भी प्रकार से इसे नहीं मारा जा सकता इसे इस महल में दफना दो और इस महल को हमेशा के लिए बंद कर दो और यहां किसी का भी आना जाना मनाही होगा पहाड़ी के नीचे गांव बनाया जाए जिसका नाम पिशाचिन होगा और वहां रहने वाले हर एक आदमी को यह कहानी पता होनी चाहिए|

चौकीदार कहता है कि यही राज है, इस महल का |

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मैंने (लेखक अभिषेक) उस चौकीदार से पूछा कि अभी उस राक्षस को कौन मारेगा क्योंकि अब तो उस समय का कोई भी नहीं बचा होगा|

तब चौकीदार कहता है कि हमें ही उस शैतान को मारना होगा क्योंकि संयोगवश वह काल घड़ी आज ही है|

तभी अमन बोलता है कि हम हम ही क्यों नहीं हम अभी यहां से जा रहे हैं| चल अभिषेक चल यहां से अब हम यहां एक पल भी नहीं नहीं रुकेंगे|

चौकीदार बोला कि नहीं साहब अब मैं बूढ़ा हो गया हूं| मेरे में इतनी ताकत नहीं है कि मैं इस काम को अंजाम दे सकूं|

अगर आज रात एक बजने से पहले कुछ ना किया तो वह शैतान आजाद हो जाएगा|

फिर अनर्थ ही अनर्थ……

अमन बाहर जाने लगता है |अभिषेक उसके पीछे पीछे जाता है|

अमन- देख भाई अभिषेक बारिश रुक चुकी है अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है चल निकलते हैं यहां से|  यह हमारी बस की बात नहीं है.

मैं उससे बोला कि यार देख यहां, जो कुछ भी हो रहा है वह अब हमें ही ठीक करना होगा |तुझे क्या लगता है कि वह शैतान हमारे पास नहीं पहुंचेगा एक ना एक दिन तो वह हमारे पास पहुंच जाएगा |फिर क्या करेगा तू अभी वह दफन है हम जाएंगे और उसे बाहर निकाल कर

उस त्रिशूल को उसके दिल में घोप देंगे फिर सबकुछ ठीक हो जायेगा |

……चौकीदार कहता है कि उस त्रिशूल को वही उसकी दफन जगह पर रखा गया है……..

मैं उससे बोला कि यार देख यहां, जो कुछ भी हो रहा है वह अब हमें ही ठीक करना होगा |तुझे क्या लगता है कि वह शैतान हमारे पास नहीं पहुंचेगा। एक ना एक दिन तो वह हमारे पास पहुंच जाएगा |फिर क्या करेगा तू अभी वह दफन है हम जाएंगे और उसे बाहर निकाल कर

उस त्रिशूल को उसके दिल में घोप देंगे फिर सबकुछ ठीक हो जायेगा |

…चौकीदार कहता है कि उस त्रिशूल को वही उसकी दफन जगह पर रखा गया है….

अमन – हा तुम सही कहते हो, हम यहाँ से भाग नहीं सकते |

हम शायद इसी कारण से यहाँ पर है| हमें उस शैतान का अंत करना ही होगा, वक्त रहते|

हा तुम सही कह रहे हो, अमन, हमें जल्द से जल्द उसका अंत करना ही होगा| मेने कहा।

चौकीदार बोला साहब हमें समय बर्बाद नहीं करना चाहिए, जल्दी चलते है।

जैसे ही तीनो बाहर जाते है, अपने सामने कई सारे शैतानो को पाते है  वो सभी उन तीनो को चारों ओर से घेर लेते है तभी अमन और अभिषेक को पीछे हटाते हुऐ चौकीदार उन्हें अपनी वही नींबू मिर्च वाली माला दिखाता है जिससे वो सारे शैतान एकाएक धुँआ होकर गायब हो जाते है।

वो तीनो भागकर फ़िर से स्कूल मे आ जाते है।

अमन बोला कि यदि यह शैतान इस माला से डरते हैं,  तो तुम भी हमें ऐसी ऐसी ही मालाएँ दे दो ताकि हम भी उनसे बच सकें।

चौकीदार बोला कि ये  मालाएं मैंने सिद्धि करके प्राप्त की हैं और मेरे पास यही एकमात्र माला है। इसलिए मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता। मुझे माफ करना।

अमन और चौकीदार दोनों बहस कर रहे थे तभी मैंने उनसे पूछा कि जब वह शैतान आजाद नहीं हुआ तो तो फिर वह  शैतान ( भीमा ) कहां से आया।

(यही डाउट आपका भी होगा चलो क्लियर कर देते हैं)

चौकीदार बोलता है कि भले ही वह शैतान दफन हो गया है  पर फिर भी उसकी शक्तियां कमजोर नहीं हुई है अब धीरे-धीरे उसकी शक्तियां बढ़ने लगी है जब दूसरे टीचर राजेश तिवारी ने उस महल में प्रवेश किया होगा तो शायद किसी तरह शैतान ने उनको अपने वश में कर लिया होगा और शायद उन्हीं की वजह से यह सब गांव के लोग शैतान बने होंगे इससे  ज्यादा मुझे कुछ भी नहीं पता है।

चौकीदार बोलते वक्त कुछ सोचने लगता है।

…. रात होने लगी थी…..

अमन और चौकीदार दोनों इधर-उधर की बहस कर रहे थे पर अभिषेक उस पहाड़ी पर कैसे जाऊं यही सोच रहा था तभी उसे टीचर्स की बुक अलमारी के पीछे एक  पुस्तक मिली  उसके हाथ में पुस्तक देख चौकीदार थोड़ा घबरा गया वह पुस्तक सबसे अलग थी इस कारण से उसका इस पर ध्यान गया उसने पुस्तक खोली और उसको पढ़ा उसमें किसी तांत्रिक विद्या के बारे में लिखा था जो उसको समझ में नहीं आया आगे कुछ राजेश तिवारी के बारे में लिखा था।

मैं,  राजेश, इस पिशाचिन गांव में आया हूं मुझे इस पहाड़ी पर बने महल का राज पता चल गया है एक दिन जब मैं पहाड़ी पर घूम रहा था तब मुझे एक पत्थर पर कुछ लिखा हुआ मिला जो किसी और भाषा  में लिखा था यह बहुत पुरानी भाषा  थी। इसलिए यह मुझे समझ में नहीं आई ।

तब मैं इसे अपने दोस्त नितिन शर्मा के पास ले गया जो इस तरह की भाषा के बारे में अच्छी तरह  जानता था उसने थोड़ी देर बाद उस भाषा को पढ़कर बताया कि यह एक बहुत ही पुरानी भाषा है जो उस समय बहुत कम लोग जानते थे इस पर लिखा है कि उस शैतान का अंत दो सो  साल बाद अमावस की रात  के एक घड़ी बाद ठीक 1:00 बजे होगा इससे पहले इसने  खून किसी भी तरह चख  लिया तो यह  फिर जीवित हो उठेगा। Manav Bhediye Ki Khaufnak Kahani.

पर हमें यह नहीं पता था कि उस शैतान का जिस्म कहां गाढ़ा गया है। अब मैंने उस गांव के आसपास से पता लगाया कि यहां पर 200 साल पुरानी कोई चीज है तब मुझे इस महल के बारे में पता चला और मैं यहां टीचर बनकर आया था ताकि किसी को मुझ पर शक ना हो। मैं उस शैतान  को पूरी दुनिया के सामने पेश करने वाला हूं।

मैं चौकीदार से बोला कि क्या उस टीचर राजेश तिवारी के बारे में तुम कुछ  जानते हो।

चौकीदार बोला कि हां वह टीचर थोड़े अजीब तो थे। क्योंकि हर दम वह इस गांव में कुछ ना कुछ ढूंढ़ते  ही रहते थे।

बाकी का स्टाफ यहां नहीं है वह सब कहां गए मैंने पूछा ।

चौकीदार थोड़ा हिचकिचाता है और बोलता है कि साहब हमारे पास इतना समय नहीं है कि सारे सवालों के जवाब दिये जाये।हमें जल्दी करनी होंगी वरना वो शैतान जाग गया,तो फ़िर समझो अनर्थ।

मैंने ( अभिषेक )कहा ठीक है, हम सब अभी जाते है और उस शैतान को नरक में भेज देते है | वही उसकी सही जगह है।

अमन ने भी जोश में कहा – ठीक है । आज तो उसका अंत, मैं ही करूँगा  एक बार सामने तो आये वो मेरे।

चलो, तो चलते है हम सभी -चौकीदार बोला

वो मुस्कुराया।

(हमारे पास भी ज्यादा समय नहीं बचा था. )

हम फिर बाहर गये,  पर इस बार वहाँ  हमें कोई भी शैतान नहीं दिखा।  हम धीरे धीरे सावधानी से आगे बढ़ते हुऐ, उस महल के समीप पहुँच गये।

हम तीनो उस महल के दरवाजे के सामने खड़े थे।

चौकीदार हम दोनों के पीछे खड़ा था।

मुझे (अभिषेक )अपने सपने वाली बात याद आई।

उस समय भी आसमान में काले बादल थे और बिजली कड़क रही थी जैसी इस समय कड़क रही है।

हमने दरवाजे को खोलने की कोशिश की पर दरवाजा नहीं खुला। बहुत ही मजबूती से बंद था वह दरवाजा। जब बहुत कोशिश करने के बावजूद भी वो दरवाजा नहीं खुला तो हम हार मान नीचे बैठ गए कि अब क्या करें? कैसे यह दरवाजा खुलेगा?

तभी चौकीदार ने कहा कि दरवाजे के एक तरफ की दीवार बिल्कुल ठीक है, पर एक पत्थर उस दीवार के बाहर निकला था।

मैंने अमन से कहा कि मुझे थोड़ा ऊपर तक उठा दे ताकि मैं उस पत्थर को देख सकूं क्योंकि वह थोड़ा ऊपर था। इस कारण से मैं वहां तक नहीं पहुंच पा रहा था जैसे ही अमर ने मुझे उठाया मैंने उस पत्थर को बाहर खींचने लगा और वह पत्थर बड़ी ही आसानी से बाहर आ गया और उस पत्थर के साथ में एक बड़ी सी चाबी भी बाहर आई। जो शायद उसी दरवाजे की थी और यह सच भी हुआ। जैसे ही मैंने चाबी से दरवाजा खोला।

दरवाजा अंदर की ओर खुलता चला गया।

अंदर घनघोर अँधेरा था। हम उस महल के अंदर जाने लगे। हमारे पैरो के नीचे काफ़ी कड़ कड़ की आवाज आ रही थी।

थोड़ा अन्दर जाने पर अमन को याद आया कि उसके पॉकेट में एक लाइटर है, जो उसे चौकीदार ने आते महल में आते समय दी थी । अमन ने अपनी लाइटर जलाई, जिससे की थोड़ा प्रकाश हुआ ।

पर जैसे ही प्रकाश हुआ, हम चौक गये। हमने देखा कि जिस जगह से हम होकर जा रहे थे, वहाँ पर कई सारे कंकाल पड़े थे, जिन पर से होकर हम चल रहे थे।

शायद ये उन्ही लोगो के कंकाल है जो उस समय मर गए थे। इन्ही इसी महल में लाकर रख दिया बिना इनका क्रिया कर्म करे।

अमन बोला।

तभी धीरे धीरे वहाँ एक नीला धुआँ होने लगा। और वो कंकाल धीरे धीरे उठने लगे।

हम सबकी तो हालात ही खराब हो गई,यह देखकर।

वो सब पूरी तरह से रक्त पिशाच बन चुके थे। धीरे धीरे वो हमारी तरफ बढ़ने लगे।

हम भी भागे और भागते भागते उस महल के एक कक्ष में आ गये। वो शैतान अभी भी हमारे पीछे आ रहे थे। अमन ने दरवाजा बंद कर दिया। हम सभी हाफ ही रहे थे कि तभी चौकीदार बोला कि चलो उस दरवाजे से आगे बढ़ते हैं, वो वहाँ कोने में जो है हम भी उसी दरवाजे की तरफ बढ़ गये। वहाँ से आगे निकलने पर हमे तीन दरवाजे मिले। हमे नहीं पता कि हम किस दरवाजे से जाए, तभी पीछे से शैतानों के आने की आवाजें आ रही थी। Preton Ki Darawani Kahani.

हमने सबसे पहला दरवाजा खोला और उसमे चले गये। हमने दरवाजा बंद कर दिया। उस कमरे में बहुत गंदी बदबू थी, अमन ने अपनी लाइटर ऑन की। उस कमरे में एक कब्र थी।

यह जरूर रानी की कब्र होगी। चौकीदार बोला।

मेने उससे कहा तुम्हें कैसे पता  कि यह रानी की कब्र है?

क्यूँकि यह यहाँ इतने अन्दर है और इस पर लिखा भी है। तब हमने भी देखा उस पर सही लिखा था और वहाँ कुछ और भी लिखा था। जो हमारी समझ के परे था।

फ़िर हम उस कमरे से बाहर निकले और हमने अगले दरवाज़े में प्रवेश किया। उस दरवाज़े से हम एक ऐसे कमरे में पहुंचे, जो बड़ा ही विचित्र था। उस कमरे के अंदर कोई किसी तरह का काला जादू किया होगा। क्योंकि उस जगह पर कई तरह की काला जादू करने की चीजें रखी थी।

चौकीदार ने कहा कि हमें यहां समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। चलो अब उस तीसरे दरवाजे की तरफ चलें।

तीसरा दरवाजा अंदर तहखाने में जा रहा था। लाइटर का प्रकाश भी धीरे-धीरे कम हो रहा था।  मैंने आसपास की लकड़ियों को उठाया और अपने रुमाल को उनके चारों ओर लपेट दिया और एक मशाल बनाई। हम धीरे-धीरे तहखाने में जाने लगे। हम अब तहखाने  के अंदर आ चुके थे। थोड़ा आगे जाने पर हमने देखा कि सामने एक बड़ी सी क़ब्र थी।

चौकीदार बोला कि यही वह क़ब्र है। जिसके भीतर वो  शैतान  कैद है।  हमें इसे जल्दी खोदना होगा और शैतान को मार डालना होगा, वरना समय निकल जाएगा।

मैं और चौकीदार कब्र खोदने लगे और अमन त्रिशूल को ढूंढने लगा। धीरे-धीरे मिटटी हटाते हुए उस शैतान का अस्थि पंजर सामने आने लगा। सच में, वह शैतान काफी बड़ा था। जिसका  पता उसके कंकाल को देख देख कर लग रहा था। अमन भी उस त्रिशूल को ढूंढने में लगा था। त्रिशूल को  ढूंढते हुए वह थोड़ा  तहखाने के आगे की ओर चला गया। इसी बीच,  हमने उस शैतान के कंकाल को भी पूरी तरह  से खोद  निकाला था। Ganv Ki Darawani Kahaniya.

इधर अमन भी अपना काम कर रहा था। थोड़ा आगे जाने पर अमन को एक कुआं दिखाई दिया। उस कुएँ के निकट में एक बड़े से  पत्थर पर त्रिशूल बना हुआ था। अमन समझ गया कि हो ना हो त्रिशूल इसी कुए के अंदर हो। वो कुएं में बनी सीढ़ियों से नीचे जाने लगा। कुएं के तल में पहुंचकर उसे एक दरवाजा मिला। उसने उस दरवाजे को खोला और अंदर चला गया। वहीं एक मूर्ति के पास में उसे वह त्रिशूल मिला। उसने उस त्रिशूल को जैसे ही उठाया वह जगह जोरों से हिलने लगी और वहां की छत गिरने लगी। पर अमन वहां से बच के बाहर आया और कुएं के तल से ऊपर आने लगा। वह जैसे ही ऊपर आने लगा वैसे ही कुएं में नीचे से तेजी से पानी भरने लगा। पर अमर  तेजी के साथ आगे बढ़ते हुए  कुएं के ऊपर आ गया। जैसे ही वो ऊपर आया। पूरा कुआँ पानी से भर गया।

अमन ने हमारी ओर आते हुए कहा कि त्रिशूल मिल गया। कहां है? वो शैतान।

अमन ऐसा बोलते ही नीचे जा गिरा और उसके हाथ से वह त्रिशूल मेरी तरफ जा गिरा। मैं परिस्थिति को नहीं समझ पाया और जैसे ही में त्रिशूल उठाने नीचे झुका, मेरे सर पर एक जोर का प्रहार हुआ और मैं बेहोश हो गया।

जब मुझे होश आया तो मुझे कुछ मंत्र पढ़ने की आवाज सुनाई दी। मैंने अपने आप को हिलाने की कोशिश की, पर में बंधा हुआ था। मैंने सामने देखा कि अमन मेरे थोड़ा आगे बेहोश पड़ा है और वो  चौकीदार जोर-जोर से कुछ मंत्र बड़बड़ा रहा था। मैंने उससे बोला कि तुम यह सब क्या कर रहे हो? हमें बांध के क्यों रखा है? उस समय मेरे मन में काफी सवाल थे जो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे थे। वो चौकीदार हंसने लगा और बोला कि तुम लोग बहुत भोले हो और आसानी से मेरी बात में आ गए। मैं कोई चौकीदार नहीं हूं बल्कि मैं राजेश तिवारी हूं।

अब मुझे बात समझ में आई कि क्यों यह चौकीदार इतनी अजीब तरीके की हरकतें कर रहा था और महल के अंदर आने का और तहखाने का रास्ता यह अच्छी तरह से कैसे जानता था।

तुमने मेरी किताब अधूरी ही पढ़ी है। मैं तुम्हें बताता हूं कि उसमें आगे क्या लिखा था? जब वह शैतान मर गया, तब मृत्युंजय ने उस शैतान को इस महल में दफनवा दिया। उस समय मृत्युंजय के गुरु संत ज्ञानेश्वर जी  ने उससे कहा था कि इस त्रिशूल की मदद से इसे मारा भी जा सकता है और इसे नियंत्रित भी किया जा सकता है और इसे केवल वही आदमी मार सकता है जो तुम या फिर तुम्हारे खानदान या फिर जिसने अर्ध पिशाचिनी नक्षत्र में अकाल घड़ी में जन्म लिया हो। और मैं यानी कि राजेश तिवारी ही इस शैतान को मार सकता हूं।

मैंने उससे कहा कि जब तुम ही इसे मार सकते थे तो तुम्हें हमारी क्यों मदद चाहिए थी।

पहले मैं इस शैतान को मारने के लिए ही इस गांव में आया था। जैसे जैसे 200 साल पूरे होने का समय नजदीक आ रहा था। वैसे वैसे ये शैतान अपना असर दिखाना शुरू कर रहा था। मैं और गांव के कुछ लोग इसे मारने के लिए इस महल में पहले भी आए थे। पर जैसे ही इस शैतान को हमने कब्र से बाहर निकाला,एक गांव वाले का हाथ फावड़े से कट गया और उस गांव वाले का खून शैतान के शरीर पर जा गिरा और शैतान देखते ही देखते अपने वास्तविक आकार में आने लगा। उसे देखकर सब गांव वाले यहां से भागने लगे।

पर उस शैतान ने उन सभी को मार दिया। वह जैसे ही मेरे पास आया.। मैंने उससे कहा कि मुझे माफ कर दो, मुझे छोड़ दो, पर उस शैतान ने मुझे नहीं मारा। बल्कि उसने मुझसे कहा कि मैं तुम्हें नहीं मारूंगा। बस तुम मुझे यहां से आजाद कर दो। मैं यहां देवीय मंत्रों से बँधा हूं। अगर तुमने मुझे इस जगह से आजाद कर दिया तो मैं तुम्हें इतना ताकतवर बना दूंगा कि तुम इस दुनिया पर राज करोगे। उसने मुझसे कहा कि मुझे ठीक 200 साल पूरे होने पर दो ऐसे आदमियों का खून चाहिए जो अर्ध पिशाचिनी नक्षत्र में अकाल घड़ी में पैदा हुए हो। मैं तुम्हें बताता हूं कि वह तुम्हें कहां मिलेंगे? फिर उसने मुझे तुम्हारा चेहरा और तुम्हारा पता बताया।

उसने मुझे कहा कि इन दोनों इंसानों अर्थात तुम दोनों के अलावा और किसी का भी खून उसे ज्यादा समय तक अस्तित्व या सक्रिय नहीं रख पाएगा। इसलिए इस काल घड़ी तक मुझे तुम्हें यहां लाना था और तभी से मैंने इस गांव में लोगों को डरा कर गांव वालो को गाव खाली करने पर  मजबूर कर दिया। गांव वालों के साथ ही यहां के  बाकी टीचर्स भी चले गए। क्योंकि वो भी नेगेटिव एनर्जी  महसूस करने लगे थे।

फिर मेने तुम दोनों को इस गांव में बुलाया। अब समय आ गया शैतान को जगाने का।

वो अमन को घसीटते हुए उस शैतान के कंकाल के पास ले गया और चाकू से उसने अमन के हाथ में एक कट लगाया और उसे शैतान के शरीर पर उसका खून बहाने लगा। धीरे-धीरे वह शैतान एक आकार लेने लगा।

इधर में अपना बँधा हाथ छुड़ाने लगा। धीरे-धीरे रस्सी ढीली पड़ने लगी और थोड़ी देर बाद मैंने अपना हाथ रस्सी से छुड़ा लिया। फिर मेने अपने बंधे पैर रस्सी से छुड़ाए और जैसे ही मैं अमन को बचाने निकला उस राजेश तिवारी ने मुझे पकड़ लिया। मेरी उससे लड़ाई हुई और मौका पाकर मैंने उसके मुंह पर मुक्का मार दिया। जिससे वह दूर जा गिरा। मैं अमन के पास गया और उसे होश में लाने लगा कि तभी मैंने देखा वह शैतान अधूरा आकार लिए खड़ा हुआ  और मेरी ओर आने लगा। उसने मुझे दूर उठा कर फेंक दिया और अमन की ओर बढ़ने लगा। Novel Horror Stories In Hindi.

राजेश तिवारी दौड़ के उसके पास गया और बोला मालिक मैंने आपका काम कर दिया। अब मुझे सर्वशक्तिमान बना दो।

वो राक्षस जोर से दहाड़ा और अपने तीनो अधूरे विकसित नाखून उसकी (राजेश तिवारी) की छाती में भर दिए। राजेश तिवारी वहीं पर मर गया।

फिर वह अमन की ओर बढ़ने लगा, तब तक अमन को भी होश आ गया था। उसने उस शैतान को देखा और लंगड़ाते हुए वहां से भागने लगा। मैंने भी उस त्रिशूल को उठाया और उस शैतान की ओर बढ़ते हुए  उसके पैर में उस त्रिशूल को भर दिया। शैतान जोर से चिल्लाया पर वह मरा नहीं।

तभी मुझे राजेश तिवारी की बात याद आयी कि शैतान तभी मरेगा जब त्रिशूल उसके सीने में घुसेगा। उस शैतान ने त्रिशूल को अपने पैर से बाहर निकाला और उसे दूर फेंक दिया और मुझे एक ही झटके में पकड़ कर अपनी और खींच लिया। उस शैतान ने अपने कंकाल खोपड़ी वाले मुंह से दो बड़े बड़े दांत निकाले और मेरा खून पीने ही वाला था कि तभी वह जोर से दहाड़ा और उस ने मुझे दूर फेंक दिया। उसके सीने के आर-पार त्रिशूल निकला हुआ था जिसे अमन ने उसकी छाती में गाड़ दिया था। वह राक्षस वही जलकर मर गया। उसके मरते ही महल गिरने लगा मैंने अमन को उठाया और हम वहां से बाहर भागने लगे। बचते बचाते  हम उस महल से बाहर आ गए। वह महल पूरी तरह से जमीन में धंस गया था।

मैंने अमन से कहा यार तूने तो मुझे बचा लिया वरना वो शैतान तो मुझे कच्चा ही चबा जाता।

अमन बोला- मैंने नहीं हम दोनों ने इस दुनिया को उस शैतान से बचा लिया है।

मैंने कहा- वह तो है।

और हम दोनों हंसने लगे।

पढ़ने के लिए धन्यवाद।

दोस्तों, मैं आशा करता हूँ कि आपको “क्या राज़ है? पिशाचों का रहस्यमयी गाँव (Kya Raaz Hai?)” शीर्षक वाली यह Real Horror Story पसंद आई होगी। ऐसी और भी Real Ghost Stories In Hindi में सुनने के लिये, हमारे ब्लॉग Horrorstoryhindi.com पर बने रहे। यदि आप YouTube पर Ghost Stories सुनना पसंद करते है तो मेरे YouTube ChannelCreepy Content” को सब्सक्राइब कर ले।

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